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आखिरी शाही स्नान को संगम तट पर उमड़े श्रद्धालु

Fri, 15 Feb 2013 03:19 PM IST
महाकुंभ नगर(इलाहाबाद)/इंटरनेट डेस्क
महाकुंभ नगर(इलाहाबाद)/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 15 Feb 2013 03:19 PM IST
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last shahi snan of maha kumbh starts at sangam

संगम पर आज बसंत पंचमी के दिन महाकुंभ का तीसरा शाही स्नानपर्व अपनी सादगी और भव्यता के साथ जारी है। सबसे आगे महानिर्वाणी अखाड़ा, सहयोगी अटल अखाड़े के साथ सुबह सवा पांच बजे छावनी से निकलकर सवा छह बजे संगम पहुंचा। और सबसे पहले महानिर्वाणी के संतों ने संगम में ड़ुबकी लगाई। प्रशासन का अनुमान है कि आज लगभग दो करोड़ श्रद्धालु स्नान करेंगे, इसलिए विशेष तैयारियां की गई हैं।  

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महानिर्वाणी के बाद आनंद के साथ पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी और जूना में साथ आवाहन, अग्नि, संन्यासिनी अखाड़ा तथा अलख दरबार के संतों ने डुबकी लगाई। उसके बाद अखाड़ों के महामंडलेश्वर, महंत, श्रीमहंत मौनी अमावस्या पर हुए हादसे में मृत लोगों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण भी दिए। तीसरे शाही स्नान पर नए बने महामंडलेश्वर और संन्यासियों ने भी डुबकी लगाई। इलाहाबाद के कमीश्नर देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि अभी तक करीब 55 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान कर लिया है। 

 

इससे पूर्व स्नानपर्व के मद्देनजर विभिन्न अखाड़ों की ओर से महामंडलेश्वरों के रथों को सजाने का काम पूरी रात जारी रहा। अंतिम स्नानपर्व के कारण अखाड़ों और उनके महामंडलेश्वरों में गज़ब का उत्साह था।
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शाही जुलूस में पहली बार शामिल होने को लेकर नए महामंडलेश्वरों की ओर से उनके रथों को और आकर्षक तरीके से सजाया गया था। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक रवानगी के पहले आराध्य और निशान की विशेष पूजा की गई, फिर अभिमंत्रित करके श्रृंगार के तहत नागा संन्यासियों को भस्म लगाई गई। अग्नि अखाड़े के सभापति श्रीमहंत गोपालानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक बसंत पर्व के कारण लौटने पर अखाड़े की परंपरानुसार वाग्देवी सरस्वती की पूजा की जाएगी।
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शामिल हुए नए बने नागा
दूसरे स्नान पर्व के बाद विभिन्न अखाड़ों में जिन लोगों को संन्यास की दीक्षा दी गई थी, उन्हें तीसरे शाही स्नानपर्व पर भोर में नागा की दीक्षा देने के बाद ‘लंगोटी’ उतारकर दिगंबर बनाया गया।

पंचमी का पर्व विशेष फलदायी
बृहस्पतिवार को सुबह 10.19 बजे के बाद माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी शुरू हुई जो शुक्रवार को सुबह 10.57 बजे तक रहेगी। ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्णेय के मुताबिक उदयातिथि के कारण सूर्योदय से लेकर 11 बजे तक की अवधि पुण्य काल है। वैसे पंचमी तिथि के कारण गणपति आराधना के बाद डुबकी विशेष फलदायी होगी।


स्नानार्थियों के लिए विशेष प्रबंध
स्नानार्थियों के लिए मेला क्षेत्र में 22 घाट तैयार किए गए हैं। रेलवे स्टेशन के आसपास रैन बसेरे भी बनाए गए हैं। एसएसपी कुंभ मेला आरकेएस राठौर ने बताया कि जिले में छह जगहों से स्नानार्थियों की भीड़ प्रवेश कर रही है। वीआईपी वाहनों को मेले में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।

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