गुरु आ रहे हैं अपनी उच्च राशि में, क्या असर दिखाएंगे देश दुनिया पर?
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बीते साल 31 मई को गुरु वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में आया था। करीब एक साल तक अपने शत्रु ग्रह बुध की राशि में गोचर करते हुए गुरु महाराज 19 जून को अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने वाले हैं। गुरु का अपनी उच्च राशि में आना कई मायने में सुखद और शुभ फलदायी रहेगा।
गुरु का यह गोचर, अर्थव्यवस्था, मौसम, समाज और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से समान्य रुप से अच्छा रहने वाला है। धार्मिक गतिविधियों में लोगों का रुझान बढ़ेगा। आस्था में वृद्घि होगी, यह कहना है ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा का।
क्या गुरु दिलाएंगे महंगाई से राहत?
आम जनता की नजर इन दिनों सबसे अधिक आर्थिक मुद्दों पर है क्योंकि महंगाई के कारण उन्हें सबसे अधिक परेशानी हो रही है। इसलिए सबसे पहले अर्थव्यवस्था पर गुरु के कर्क में आने का प्रभाव देखते हैं।
गुरु का कर्क राशि में आना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए समान्य रुप से अच्छा रहेगा, यूं कहें तो मिलाजुला फल देने वाला रहेगा। आंकड़ों में महंगाई दर कम होता हुआ दिखेगा लेकिन व्यवहारिक तौर पर आम जनता को अधिक राहत नहीं मिलेनी वाली है।
शेयर मार्केट की स्थिति थोड़ी बेहतर होगी और बैंकिंग और फाइनेंस के क्षेत्र में स्थिति सुधरेगी। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की स्थिति बेहतर होगी।
देश की राजनीति पर गुरु का प्रभाव
गुरु का अपनी उच्च राशि में आना धार्मिक दृष्टि से बढ़िया है। लोगों की धार्मिक आस्था मजबूत होगी। धार्मिक स्थलों के विकास एव उनकी मर्यादा को बनाए रखने के लिए नए प्रयास होंगे। साधु-संन्यासियों का मान-सम्मान बढ़ेगा। लेकिन राजनीतिक दृष्टि से गुरु का यह गोचर स्वेच्छाचारिता और तानाशाही व्यवस्था को मजबूत बनाएगा।
राजनीति में दल-बदल की घटनाओं में वृद्घि होगी। राजनेताओं के भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में शामिल होने के मामले सामने आएंगे। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक माहौल दूषित होगा।
अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में गुरु का प्रभाव
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण के मौके पर भारत आने का न्यौता देकर मोदी की सरकार ने पड़ोसी देशों से बढ़िया संबंध बनाने के संकेत दिए हों लेकिन ग्रहों की स्थिति बताती है पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में विशेष सुधार नहीं होने वाला है।
सीमा पार से आंतकवादी गतिविधियों में वृद्घि होगी। सीमा पर तनाव की स्थितियां पैदा हो सकती है। पश्चमी देशों से भी भारत को विशेष लाभ नहीं मिलने वाला है।