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आज दोपहर से 23 घंटे तक चलेगा मौनी का महास्नान

Sat, 09 Feb 2013 11:57 AM IST
महाकुंभ नगर/अनिल सिद्धार्थ
महाकुंभ नगर/अनिल सिद्धार्थ Updated Sat, 09 Feb 2013 11:57 AM IST
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holy bath of mauni amawasya for 23 hours
महाकुंभ पर्व का तीसरा और अखाड़ों के लिए दूसरा शाही स्नानपर्व मौनी अमावस्या रविवार को है। तकरीबन 147 बर्षों बाद घटित दुर्लभ ग्रहीय संयोग के कारण अबकी महाकुंभ पर्व का मौनी महास्नान पर्व अति विशिष्ट है। इससे पहले ऐसा संयोग जनवरी 1865 में प्रयाग में ही अर्धकुंभ में बना था।
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भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री आचार्य अविनाश के मुताबिक नौ फरवरी को दोपहर 2.28 बजे से अमावस्या तिथि शुरू होकर 10 फरवरी को दोपहर 12.47 बजे तक रहेगी। अमावस्या पर शनिवार की रात 11.02 बजे से शुरू वरियान नामक योग रविवार की रात 8.34 बजे रहेगा। भोर से शुरू श्रेष्ठ धनिष्ठा नक्षत्र मनोवांछित फलदायी है।
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इस महास्नान पर्व पर देवगुरु बृहस्पति के वृष राशि के साथ शनि तथा राहु का तुला राशि में संचरण हो रहा है। इस संचरण से बना दुर्लभ संयोग अति फलदायी माना जा रहा है। सनातन धर्म की मान्यता के मुताबिक इस मौके पर संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने पर अक्षय पुण्य मिलता है।
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महाकुंभ पर्व पर अनेक शंकराचार्य, महामंडलेश्वर, संत-महात्मा, नागा और करोड़ों श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाएंगे। अमावस्या पर स्नान का पुण्य अर्जित करने को देश-विदेश से श्रद्धालुओं का संगम की रेती पर आने का क्रम जारी है। इसके लिए अखाड़ों की ओर से खासी तैयारियां की गई हैं। अखाड़े के देवता और आचार्य महामंडलेश्वर की अगुवाई में संत-महंत डुबकी लगाएंगे। संन्यासी और उदासीन अखाड़ों के शाही जुलूस में सबसे आगे नागा और निर्वाण नागा साधु चलेंगे।

निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक शाही जुलूस में नए बने महामंडलेश्वर भी शामिल होंगे लेकिन उनका क्रम वरिष्ठ महामंडलेश्वरों के पीछे रहेगा। इसी तरह मकर संक्रांति के बाद जिन संन्यासियों को नागा बनाया जाएगा, वह जुलूस में तो आगे रहेंगे लेकिन वरिष्ठता के क्रम में वे पहले बने नागाओं के पीछे-पीछे चलेंगे। शाही जुलूस के लिए अखाड़ों के सचिवों और महामंडलेश्वरों की ओर से खासी तैयारियां की गई हैं।

अखाड़ों की मांग पर अमल करते हुए अखाड़ा मार्ग को और चौड़ा किया जाएगा। अब तक एक लेन के कारण आ रही दिक्कतों को दूर करते हुए दूसरे शाही स्नान से पहले इसे डबल लेन बनाया जाएगा ताकि जुलूस छोटा हो और पीछे रहने वाले महामंडलेश्वरों को संगम तक के लिए छोटा रास्ता तय करना पड़े। इसी तरह स्नान घाटों को चौड़ा करने सहित सुरक्षा प्रबंध को और चुस्त-दुरुस्त किया जाएगा।

कई शंकराचार्य, संत भी लगाएंगे डुबकी
मौनी अमावस्या के शाही स्नानपर्व पर रविवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम आदि शामिल रहेंगे।

इसके अतिरिक्त मौनी पर डुबकी लगाने वाले प्रमुख संतों में जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनिजी, महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद, महामंडलेश्वर पायलट बाबा, महामंडलेश्वर दाती जी,  महामंडलेश्वर कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानंद,  योग गुरु बाबा रामदेव, संत आसाराम बापू, पंडित देवप्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’, तांत्रिक चंद्रास्वामी, स्वामी नित्यानंद आदि शामिल हैं।


महानिर्वाणी आगे, निर्मल रहेगा पीछे
शाही स्नान के क्रम में सबसे आगे अटल के साथ पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, आनंद के साथ पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी और जूना में साथ आवाहन, अग्नि, संन्यासिनी अखाड़ा तथा अलख दरबार के संत रहेंगे। वैष्णवों में मकर संक्रांति के दिन निर्वाणी अनी आगे था, मौनी अवास्या पर सबसे आगे निर्मोही अनी, बीच में दिगंबर, अंत में निर्वाणी अनी के साधु डुबकी लगाएंगे। तीसरे चरण में नया उदासीन, बड़ा उदासीन और अंत में निर्मल अखाड़े केसंत स्नान करेंगे। प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए चालीस मिनट का समय दिया जाएगा।
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