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अखाड़े के ‘हाईकोर्ट’ में मिलता है ‘फास्टफूड’

Wed, 30 Jan 2013 10:42 AM IST
महाकुंभ नगर/ अनिल सिद्धार्थ
महाकुंभ नगर/ अनिल सिद्धार्थ Updated Wed, 30 Jan 2013 10:42 AM IST
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high court of akhadas provide fast food
अखाड़े में ‘हाईकोर्ट’! सुनकर कोई भी चौंक सकता है और जिसने देख लिया, उसके तो अचरज का ठिकाना नहीं। अचरज इसलिए कि इस हाईकोर्ट में छोटे-छोटे विवादों के फैसलों के साथ ही फटाफट खाने-पीने वाला ‘फास्टफूड’ तैयार होता है।
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पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के भीतर बनी अखाड़े जैसी व्यवस्था की तरह संचालित ‘हाईकोर्ट’ किसी शानदार कैंटीन से कम नहीं। यह न सिर्फ अखाड़े की रसोई से एकदम अलग बल्कि इसकी भाषा और इसके व्यंजन भी अलग हैं। इसमें सुबह-शाम साधुओं की पसंद का नाश्ता बनता है, इसीलिए अखाड़े के साधुओं को इसकी नई डिश का शिद्दत से इंतजार होता है।
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हाईकोर्ट का खजाना भी खास है। इसमें अखाड़े के भ्रमणशील पंचों सहित अन्य महात्माओं की ओर से श्रद्धा और हैसियत के मुताबिक उस धनराशि में से अंशदान दिया जाता है जिसे वह पूरे देश में घूमने के दौरान अपने भक्तों से प्राप्त करते हैं। इस राशि से ही साधुओं के लिए समोसा, रसगुल्ला, टिक्की, पकौड़ी, डोसा, दाल-बाटी, बाटी-चूरमा, मक्के की रोटी-सरसों का साग सहित जाने कितनी तरह का ‘कड़ा प्रसाद’ (हलुआ) बनता है।
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अखाड़ा ‘हाईकोर्ट’ के मौजूदा महंत बाबा लक्ष्मण दास के मुताबिक संतों की इच्छा हुई तो एक दिन में कई-कई तरह के व्यंजन भी बनते हैं। रसोई से इतर हाईकोर्ट में स्वादिष्ट ‘माल घोटाया’ जाता है। यानी ‘कड़ा प्रसाद’ का हलुआ मेवे से भरा और घी से तर होता है। हाईकोर्ट में दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, गुजरात, बंगाल के रसोइयों के साथ अखाड़े के निर्वाण साधु बतौर सेवादार जुटते हैं।
0 87 वर्ष पहले बना था हाईकोर्ट

वर्चस्व के एक विवाद में लाहौर ‘हाईकोर्ट’ की ओर से वर्ष 1926 में उदासीन संप्रदाय के पक्ष में दिए गए फैसले केबाद ही संप्रदाय के साधुओं ने खुशियां मनाते हुए, अखाड़े के भीतर भी ‘हाईकोर्ट’ की नींव डाली। इसमें छोटे-छोटे विवादों के निपटारे होते हैं लेकिन हाईकोर्ट की शान है ‘फूडकोर्ट’।


‘हाईकोर्ट’ के चौथे महंत बाबा लक्ष्मण
तकरीबन 87 वर्षों में हाईकोर्ट को चार महंत मिले। स्थापना के बाद श्रीमान महंत सोहनदास अलबेला इसके पहले मुखिया बने। उनके बाद मंगलदास, पूरनदास और अब लक्ष्मण दास इसकेश्रीमान महंत हैं। इसकी व्यवस्था संभालने को भंडारी, कोठारी, कारबारी और कोतवाल भी हैं।
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