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बंदूक, राइफल की शौकीन हैं जूना अखाड़े की दया भारती

Fri, 01 Feb 2013 08:46 PM IST
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/विजय सक्सेना
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/विजय सक्सेना Updated Fri, 01 Feb 2013 08:46 PM IST
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gun rifle fond daya bharti of juna akhada

फिल्मी सितारों और सियासी लोगों को जुटाकर शान बढ़ाने वाले संतों के खुद के शौक भी निराले हैं। किसी को चार-चार इंच हिल वाली खड़ाऊ पहनना पसंद है तो कोई भारी भरकम कमांडो के साथ चलना पसंद करता है।

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इन सबके बीच महाकुंभ में एक ऐसी नागा संन्यासिनी भी हैं, जिन्हें शास्त्रों के साथ हथियारों से भी बेहद लगाव है। इस संन्यासिनी को जिस तरह श्लोक रटे हुए हैं, उसी तरह दो नाली बंदूक से अचूक निशाना लगाने में भी महारत हासिल है।
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जूना अखाड़े की महंत दया भारती को बचपन से ही हथियारों का शौक है। नौ वर्ष की उम्र में ही संन्यास ग्रहण कर लिया था और दीक्षा के दौरान ही हथियार चलाने लगीं। तब से लेकर अब तक उन्होंने कई तरह की दोनाली बंदूक, पिस्टल, राइफल चलाई है।
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कई बार निशाने की प्रतियोगिता में भी वह अव्वल रहीं। उन्हें जब भी मौका मिलता है निशानेबाजी में हाथ आजमा लेती हैं। संत बनने के बाद हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण करने वाली महंत दया भारती का कहना है कि शस्त्रों को चलाने का प्रशिक्षण उन्हें उनके अखाड़े के गुरु महंत दिगंबर राम भारती ने दिया।

उनके पास एक डबल बैरल बंदूक का लाइसेंस भी है। हालांकि उन्होंने इसका कभी भी दुरुपयोग नहीं किया। गुरु ही उन्हें निशाने की प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाते थे।

हथियारों की जानकारी लेना जुनून
हथियारों के बारे में उन्हें ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने का जुनून सा है। वह अक्सर भक्तों से इसके बारे में जानकारी हासिल करती हैं। महाकुंभ में आए एटा के भक्त शिवकिशोर ने बताया कि उन्होंने महंत जी को कई बार कई हथियारों के बारे में जानकारी दी है।

गाड़ी चलाने का भी शौक
राजस्थान के धौलपुर जिला स्थित राजाखेड़ा हनुमान धाम आश्रम में रहने वाली महंत दया भारती को हथियारों के साथ ही तरह-तरह की लग्जरी गाड़ियां चलाने का भी शौक है। उनके पास दो लग्जरी गाड़ियां भी हैं, जिसे वह स्वयं चलाती हैं। बताया कि वह खुद ड्राइव कर संगम नगरी पहुंची हैं।


इसके पहले हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में लगने वाले कुंभ में भी शामिल हो चुकी हैं और सभी जगह राजस्थान स्थित आश्रम से स्वयं ही गाड़ी चलाकर पहुंची। चारों धाम की यात्रा भी उन्होंने की है और लगभग सभी यात्राओं में वह गाड़ी खुद चलाती हैं।

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