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गंगा को बना दिया मैला ढोने वाली मालगाड़ी
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jan 2013 09:18 AM IST
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गंगा को बचाने का अभियान गति पकड़ता नजर आ रहा है। महाकुंभ क्षेत्र में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने, नदी की सफाई तथा जल की मात्रा बढ़ाने को लेकर कई स्तर पर गतिविधियां चल रही हैं। रविवार को परमार्थ निकेतन के शिविर से राज्यपाल बीएल जोशी ने गंगा को बचाने के लिए श्रद्धालुओं से गंदगी न करने की अपील की थी।
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सोमवार को जल बिरादरी ने गंगा को बचाने के लिए सरकार से बड़े कदम उठाने को कहा। जल बिरादरी तथा गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को हुई ‘गंगा संसद’ में गंगा सहित देश की अन्य नदियों को बचाने पर चर्चा हुई। पर्यावरणविदों ने गंगा में बांध न बनाने, रीवर और सीवर को अलग करने की योजना बनाने के साथ नदियों के किनारे पौधरोपण का निर्णय लिया। गंगा संसद तीन दिन चलेगी। अगले दो दिन इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है।
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टाटा सोशल साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर परशुरामन ने नदियों को डैम से बांधने की खिलाफत की। उन्होंने कहा कि गोमुख से गंगा सागर तक 50 से अधिक डैम बन गए हैं। डैम बनेगा तो नीचे पानी कितना जाएगा यह बड़ा सवाल है। डैम बन गए लेकिन इससे होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही।
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उनके मुताबिक अमेरिका जैसे विकसित देशों में अब डैम तोड़े जा रहे हैं। हमें भी डैम पर जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, तभी गंगा सहित अन्य नदियों को बचाया जा सकता है। आज स्थिति यह हो गई है कि टिहरी से पानी न छोड़ा जाए तो गंगा में स्नान के लिए भी पानी नहीं मिलेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम नदियों और लोगों से न्याय कर रहे हैं?
जिसे कहते हैं मां, उसमें जा रहा नाले का पानी
मुख्य अतिथि गांधीवादी चिंतक एसएन सुब्बाराव ने कहा कि भारत, जहां गंगा को मां कहा जाता है, वहां इसमें नाले का पानी जा रहा है। कानून बनना चाहिए कि नदियों में गंदा पानी जाने से पहले उसे शुद्ध किया जाए। गंगोत्री से गंगासागर तक नौजवानों की टोली बनाकर काम कराया जाए, ताकि वह यह समझें कि गंगा मां है।
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने कहा कि गंगा को मैला ढोने वाली मालगाड़ी बना दिया गया है। हमें इस पर चिंतन और मंथन करने की जरूरत है। महाकुंभ केवल पाप धोने नहीं, पुण्य लेने का भी अवसर है। उन्होंने लोगों से हाथ उठाकर संकल्प कराया कि गंगा में पुण्य लेंगे, पाप नहीं। योगी सत्यम ने गंगा को बचाने के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। महंत आनंद गिरि, पंत संस्थान के निदेशक प्रदीप भार्गव, प्रणव आनंद, डॉ. अविनाश चंद्र मिश्रा समेत कई वक्ताओं ने गंगा को लेकर चिंता जाहिर की।
गंगा को राजनीति से बाहर निकालना होगा
गंगा संसद की अध्यक्षता कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गंगा को राजनीति से बाहर निकालना होगा। गंगा पर कुछ कहने, सुनने का वक्त नहीं रहा, यह निश्चित करने की जरूरत है कि हमें अविरल, निर्मल गंगा चाहिए या नहीं। उन्होंने ‘अविरल निर्मल गंगा-यमुना, हमें चाहिए इससे कम ना’ का नारा भी दिया।
सिर्फ गोष्ठी, सेमिनार से नहीं साफ होंगी गंगा
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने कहा कि फौजी प्रकृति के सबसे नजदीक रहते हैं और उन्हें जो नजर आता है, वह मन में बस जाता है। जब तक लोगों के अंदर से आवाज नहीं उठेगी, पीड़ा के साथ उत्साह नहीं होगा, नदियों का उद्धार नहीं होगा। गोमुख से गंगा सागर तक गंगा को बचाने के लिए क्या कर सकते हैं, पहले यह देखना होगा। सिर्फ गोष्ठी, सेमिनार से कुछ नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार पर निर्भरता खत्म करनी होगी। सरकार को छह माह का समय दिया जाए, उसके बाद देशवासी गंगा को साफ करने का संकल्प लें। इस मौके पर उन्होंने संगम नोज पर नौजवानों से मिलकर गंगा की स्वच्छता का संकल्प दिलाया।