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पैट्रिशिया बनी प्रेम पूजा पुरी, कैथरीन दया माता
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Sat, 02 Feb 2013 09:36 AM IST
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चेक रिपब्लिक की पैट्रिशिया, चाइना की कैथरीन यूटमिंग और स्लोवाकिया के जुराज ने शुक्रवार को वैदिक धर्म की रीति रिवाज से संन्यास की दीक्षा ले ली।
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इन तीनों को महामंडलेश्वर महेश्वरानंद ने नया नाम क्रमश: प्रेम पूजा पुरी, दया माता एवं मधुर पुरी दिया। संन्यास दीक्षा एवं हिंदू धर्म अपनाने के बाद अब ये तीनों अपने-अपने देश में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने का काम करेंगे।
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सेक्टर छह स्थित महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी जसराज पुरी की देखरेख में इन तीनों विदेशी नागरिकों की दीक्षा का कार्यक्रम पूरे रीति रिवाज से आचार्य रामाधर द्विवेदी ने करवाया। इस दौरान सबसे पहले तीनों का प्रायश्चित संस्कार कराया गया।
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इसके बाद गुरु के द्वारा मुंह में अग्नि क्रिया करवाई गई। बाद में तीनों को दस प्रकार का स्नान कराया गया। सबसे पहला स्नान भस्म का था। इसके बाद गाय के खुर की धूल, पंच गन्य, गोबर, गो मूत्र, सोने का पानी, गंगा की मिट्टी, दूध, दही एवं अंत में घी का स्नान करवाया गया।
तीनों ही विदेशी नागरिकों से उनके पूर्वजों का एवं फिर उनका भी पिंडदान मौके पर करवाया गया। गुरु के द्वारा यहां बिरजा होम भी करवाया गया। अंत में महामंडलेश्वर महेश्वरानंद ने तीनों को संन्यास का मंत्र देकर दीक्षा कार्यक्रम पूरा करवाया। तीनों ही विदेशियों के बारे में स्वामी महेश्वरानंद ने बताया कि चाइना की रहने वाली दया माता 71 वर्ष की है। उनके पति संयुक्त राष्ट्र में एक बड़े पद पर तैनात थे।
इंग्लैंड में पढ़ी दया माता अब कनाडा में रह रही हैं। वहां वह योग शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहीं हैं। दीक्षा लेने के बाद दया माता ने चाइना जाकर वहां सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने का निर्णय लिया है। इसी तरह चेक रिपब्लिक की 43 वर्षीय प्रेम पुरी भी पिछले 20 साल से योग शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रही हैं।
जबकि 34 वर्षीय स्लोवाकिया के मधुर पुरी भी अच्छे योग शिक्षक के साथ ही गायक एवं आर्टिस्ट भी हैं। इनके पिता सर्जन है। तीनों ही विदेशी नागरिकों ने अपने परिजनों की अनुमति लेने के बाद ही संन्यास की दीक्षा ली है।