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महाकुंभ: लोकरंगों से मोहती रहीं मालिनी
महाकुंभ नगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jan 2013 11:15 AM IST
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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से कुंभ नगरी में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ के तहत बुधवार को परेड मैदान स्थित मंच पर लोकरंगों की सुर सरिता बही। जानी मानी लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने लोकगायन से शाम सजाई।
उन्होंने गंगा गीत से शुरुआत कर समां बांधने के बाद उन्होंने सुनाया, रैलिया बैरन पिया को लिए जाय रे, चांदी की कटोरिया तो श्रोता झूमे। इसी क्रम में सैंया मिले लरिकइयैं मैं का करूं सहित लोकरंगों की मिठास के साथ कई गीत सुनाकर तालियां बटोरीं और पूरे समय तक लोगों को बांधे रखा। गायन के दौरान वह श्रोताओं के बीच जाकर भी उनसे रिश्ता जोड़ती रहीं। शुरुआत में केंद्र निदेशक राजेश पुरोहित ने उनका स्वागत किया।
बातचीत में मालिनी ने इलाहाबाद और लोकगायन की महिमा बखानी। उन्होंने कहा, संगीत के क्षेत्र में लोक की पहुंच सबसे ज्यादा है, बावजूद इसे हमेशा हाशिए पर ही रखा गया। जरूरत है कि लोग शिद्दत से लोक की मिठास और इसकी पहुंच को समझें। उन्होंने कहा, इलाहाबाद आना और कुंभ मेले में कार्यक्रम प्रस्तुत करना सुखद है।
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उन्होंने गंगा गीत से शुरुआत कर समां बांधने के बाद उन्होंने सुनाया, रैलिया बैरन पिया को लिए जाय रे, चांदी की कटोरिया तो श्रोता झूमे। इसी क्रम में सैंया मिले लरिकइयैं मैं का करूं सहित लोकरंगों की मिठास के साथ कई गीत सुनाकर तालियां बटोरीं और पूरे समय तक लोगों को बांधे रखा। गायन के दौरान वह श्रोताओं के बीच जाकर भी उनसे रिश्ता जोड़ती रहीं। शुरुआत में केंद्र निदेशक राजेश पुरोहित ने उनका स्वागत किया।
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बातचीत में मालिनी ने इलाहाबाद और लोकगायन की महिमा बखानी। उन्होंने कहा, संगीत के क्षेत्र में लोक की पहुंच सबसे ज्यादा है, बावजूद इसे हमेशा हाशिए पर ही रखा गया। जरूरत है कि लोग शिद्दत से लोक की मिठास और इसकी पहुंच को समझें। उन्होंने कहा, इलाहाबाद आना और कुंभ मेले में कार्यक्रम प्रस्तुत करना सुखद है।
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