ऐसे पुरुषों के होते हैं कई स्त्रियों से संबंध
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मनुष्य का विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण सामान्य सी बात है। लेकिन कुछ लोगों में यह आकर्षण इतना अधिक होता है कि वह मर्यादा की रेखा पार कर जाता है। ऐसे व्यक्ति भंवरे की तरह होते हैं जो एक कली से दूसरी कली पर मंडराता रहता है।
ठीक इसी तरह ऐसा पुरुष एक स्त्री के प्रति पूरी तरह ईमानदार और समर्पित नहीं हो पाता। इनमें पत्नी के अलावा दूसरी स्त्रियों से नजदीकी बढ़ाने की चाहत रहती है।
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि व्यक्ति का ऐसा स्वभाव उनकी कुण्डली में मौजूद ग्रहों की कुछ खास स्थितियों के कारण होता है।
पत्नी से मतभेद पराई से प्यार
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति की कुण्डली में शनि और शुक्र एक साथ एक घर में होते हैं उनके वैवाहिक जीवन में कलह की संभावना अधिक रहती है।
इसका कारण यह है कि व्यक्ति का दूसरी स्त्रियों में रुझान रहता है। शुक्र अगर मंगल के मेष या वृश्चिक राशि में बैठा हो तब तो परायी स्त्री से निकटता की संभावना काफी ज्यादा रहती है।
तब सुंदर प्रेमिकाओं की कमी नहीं रहती
आपने देखा होगा कि कुछ लोगों की सुंदर सुंदर प्रेमिका होती है। ऐसे लोगों को देखकर दूसरे लोग सोचते हैं कि पता नहीं इसमें क्या है जो इसकी इतनी गर्लफ्रैंड है। अगर आप भी किसी के बारे में ऐसा सोचते हैं तो यह जान लीजिए कि वह व्यक्ति अपनी कुण्डली में पर्वत योग लेकर आया है।
यह योग तब बनता है जब पहले, चौथे, सातवें या दसवें घर में कोई शुभ ग्रह बैठा हो। इसके अलावा छठे और आठवें घर में भी शुभ ग्रह बैठा हो या फिर इन दोनों घरों में कोई ग्रह मौजूद नहीं हो। ज्योतिषशास्त्र कहता है कि जिनकी कुण्डली ऐसी होती है उनके कई सुंदर प्रेमिकाएं होती हैं।
ऐसा व्यक्ति सौन्दर्य का दीवाना और कामी होता है
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुण्डली में चन्द्रमा जिस स्थान में बैठा है उससे अगले घर में शुक्र बैठा हो तो सुनफा नामक योग बनता है। इस योग से प्रभावित व्यक्ति चतुर होता है और भौतिक सुखों को प्राप्त करता है। लेकिन इनमें सौन्दर्य के प्रति गजब का आकर्षण होता है। काम भावना भी इनकी प्रबल होती है।
ऐसा व्यक्ति काम भावना पर नियंत्रण नहीं रख पाता
काम भावना अधिक होने पर भी अगर व्यक्ति उन पर नियंत्रण रख ले तो उनकी मर्यादा बनी रहती है। लेकिन एक अशुभ योग ऐसा है जिससे प्रभावित व्यक्ति काम भावना पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। यह योग तब बनता है जब कुण्डली के पहले घर में पाप ग्रह जैसे मंगल, राहु, शनि, केतु में से कोई भी दो एक साथ बैठा हो।
इस योग का बुरा प्रभाव तभी दूर होता है जब कोई अन्य शुभ योग कुण्डली में बन रहा हो।