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रंगीली पर कभी बरसे गुलाब तो कभी लट्ठ
बरसाना/ब्यूरो
Updated Sat, 23 Mar 2013 05:35 PM IST
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लोक रंग में भीगी लट्ठमार देखने के लिए भक्तों ने दोपहर दो बजे से ही रंगीली में डेरा डाल लिया। दुकानें, घर, छज्जे सब भक्तों से अटे थे। हुरियारों ने आकर रंगीली घेर ली।
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अबीर गुलाल से रंगी रंगीली
नंदगांव से आए सैकड़ों हुरियारों के स्वागत में रंगीली की सड़कों को अबीर गुलाल से रंगा गया।
नन्हे हुरियारे भी लै रहे चोट
नंदगांव के नन्हे हुरियारे भी जोश और उमंग के साथ भाभियों के लट्ठ की चोट मेंढक की तरह उछल के ले रहे थे। उनका जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। एक हुरियारे पै तीन-तीन गोपी जमी भईं।
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बरसी गुलाब की पंखुड़ियां
हर साल की तरह इस बार भी बरसाना के चेयरमैन बलराज चौधरी ने हेलीकॉप्टर से श्रीजी मंदिर व रंगीली गली में पुष्प वर्षा की। लठामार शुरू होने से पहले ही हेलीकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियां बरसने लगीं।
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ये नहीं थकेंगी
भैया, इन गोपियों में बड़ा दम हैं। एक घंटा हो गया पर हट नहीं रहीं। गोपियों के लट्ठों की अनवरत बौछार को देख भक्त यही कह रहे थे।
लै हाथन फूलन की छरियां, लटक लटक कै मारें सखियां
जैसे ग्वाल उछल उछल कै, ढाल ऐ इत बित घुमाय चोट लै रह्ये, वैसे ही गोपियां कूद-कूद कै लट्ठ चलाय रहीं। नई नवेली हौले-हौले बरसा रहीं।