फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Astrology Archives ›   doing their pind dan avdhoot became naga saints

खुद का पिंडदान कर अवधूत बने संन्यासी

Thu, 31 Jan 2013 11:13 AM IST
महाकुंभ नगर/अमर उजाला ब्यूरो
महाकुंभ नगर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 31 Jan 2013 11:13 AM IST
विज्ञापन
doing their pind dan avdhoot became naga saints
महाकुंभ के सबसे अहम शाही स्नान पर्व मौनी अमावस्या से पहले ही बुधवार को खुद का पिंडदान करके तकरीबन डेढ़ हजार अवधूत साधु, संन्यासी बने। पंचदशनाम जूना अखाड़ा ने इसकी पहल की। अखाड़े के अनेक आश्रमों में पंच संस्कार के बाद बने तकरीबन डेढ़ हजार अवधूतों को संगम की रेती पर गंगा किनारे संन्यास की दीक्षा दी गई।
विज्ञापन


परंपरानुसार जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने पहले उन्हें गंगा किनारे संन्यास के उद्देश्य सहित इसका अर्थ और इसकी अवधारणा की जानकारी दी। फिर अखाड़े की छावनी में आराध्य भगवान दत्तात्रेय के सामने पूरी रात हुए ‘विजयाहवन’ में उन्होंने नए संन्यासियों को मंत्र की दीक्षा दी। साथ ही संन्यास की मर्यादा और परंपरा के निर्वाह का संस्कार भी समझाया।
विज्ञापन


इससे पहले गंगा किनारे अखाड़े के मेला प्रभारी और सचिव श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती के निर्देशन में अवधूतों के नागा बनने की प्रक्रिया शुरु हुई। इसके तहत वस्त्र त्याग करके लंगोटी देने के बाद उनका मुंडन, स्नान कराया गया। तीर्थपुरोहित संतोष मिश्र और संजय बधेका की देखरेख में नई लंगोटी पहनाने के बाद उन्हें पलाश का दंड और कुल्हड़ का कमंडल देकर दंडी संन्यासी बनाया गया। इसी क्रम में जनेऊ पहनाकर पूरे शरीर पर भभूत लगाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


थाना महंत रंजीतानंद गिरि के मुताबिक यह प्रक्रिया ईश्वरीय शक्ति को अपने भीतर आत्मसात करने की प्रक्रिया भी रही। इसीलिए भोर से लेकर पूरे चौबीस घंटे तक नए संन्यासियों ने व्रत रखकर कठिन साधना की। इन अवधूतों में पूरे देश के कोने-कोने से आए अवधूत शामिल थे। इस दौरान गंगा किनारे और छावनी में भी मंत्र गूंजते रहे। हर-हर महादेव के जयकारे भी लगे। नए संन्यासियों में भी गजब का उत्साह दिखा। इस दौरान अखाड़े के कोतवाल पूरी मुस्तैदी से परिसर के इर्द-गिर्द डटे रहे।


आस्ट्रेलिया का साधु भी शामिल
नागा बनने आए तकरीबन डेढ़ हजार अवधूतों में एक विदेशी भक्त भी शामिल रहा। पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ इस आस्ट्रेलियाई अवधूत ने मुंडन से लेकर विजयाहवन तक सारे संस्कार पूरे किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed