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...वह पति के शव पर कलपती रही मगर डॉक्टर नहीं पसीजे

Tue, 26 Feb 2013 10:59 AM IST
महाकुंभ नगर/ब्यूरो
महाकुंभ नगर/ब्यूरो Updated Tue, 26 Feb 2013 10:59 AM IST
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doctors dont act on misery of wife on husband dead body
ग्वालियर से माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान को आईं बुजुर्ग कलावती ने कभी कल्पना नहीं की रही होगी कि महाकुंभ में पति से जीवन भर का साथ छूट जाएगा। उनके लिए कुंभ मेले का अनुभव बेहद दुखद और कड़वा रहा। पति का संगम के रास्ते में निधन हुआ तो सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अमानवीय व्यवहार कर डाला।
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मेले के बाहर तक शव ले जाने को एक एंबुलेंस नहीं दी, बल्कि पुलिसवालों को भी डांटकर शव को जबरन अस्पताल से बाहर सड़क पर रखवा दिया। तकरीबन चार घंटे तक शव यूं ही सड़क पर रखा रहा। परिजन रोते रहे। बाद में पुलिस ने पंचनामा भरकर किराए की वैन का इंतजाम किया।
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ग्वालियर में सेवा नगर के कैलाश नारायण गुप्ता (60) महाकुंभ में माघी पूर्णिमा पर संगम में डुबकी लगाने  की खातिर सोमवार सुबह पत्नी कलावती, बहनोई कन्हैयालाल, बहन पुष्पा के साथ बस से यहां पहुंचे। बीएचस पार्किंग में बस से उतरकर वे सभी पैदल संगम की ओर बढ़े।
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त्रिवेणी बांध से उतरकर संगम की ओर जाते समय दमा रोगी कैलाश की सांस फूलने लगी। वह वहीं बेसुध हो गए। पत्नी और बहन के रोने-कलपने पर संगम फायर स्टेशन की एंबुलेंस से कैलाश को सेंट्रल हॉस्पिटल ले जाया गया मगर स्ट्रेचर पर एंबुलेंस से वार्ड तक ले जाने पर डॉक्टर बिफर पड़े। उन्होंने कैलाश को मृत बताते हुए फौरन बाहर ले जाने को कहा।

कैलाश की पत्नी, बहन-बहनोई डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाती रहीं कि एक एंबुलेंस की व्यवस्था कर दें। वह पूरा किराया दे देंगे लेकिन डॉक्टरों ने एक नहीं सुनी। फायर सर्विस के दरोगा-सिपाहियों को भी डॉक्टरों ने डपटते हुए शव फौरन बाहर ले जाने केलिए कहा।

डॉक्टरों ने दो टूक कहा कि शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं दी जाती। शव को सेंट्रल हॉस्पिटल में रखने की व्यवस्था भी नहीं है। डॉक्टरों के दुत्कारने पर फायर सर्विस के पुलिसकर्मी और परिजन कैलाश का शव अस्पताल के सामने सड़क की दूसरी पटरी पर ले गए। वहां शव तीन घंटे तक खुले में जमीन पर रखा रहा।

कैलाश की पत्नी, बहन रोती-कलपती रहीं। खुद को परदेशी बताते हुए बार-बार अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों से एंबुलेंस के लिए मिन्नत करतीं रहीं पर वे नियमों का हवाला देते रहे। फायर सर्विस के दरोगा राजाराम सिंह ने भी आग्रह किया मगर उन्हें डांट दिया गया।

हाथ जोड़ गिड़गिड़ाते रहे चार घंटे परिजन
11 बजे से लेकर दो बजे तक परिजन हाथ जोड़कर रोते-गिड़गिड़ाते रहे। नगर निगम को सूचना दी गई तो मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके सिंह ने एक एंबुलेंस मौके पर भेजी लेकिन भीड़ में एंबुलेंस को मेला के बाहर रोक दिया गया। आखिर में कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी को खबर मिली तो उनके आदेश पर एएसपी विकास वैद्य वहां आए।

उन्होंने कैलाश के शव का पंचनामा भरवाया। एक वैन भी किराए पर मंगा दी। तब चार घंटे बाद कैलाश का शव लेकर परिजन ग्वालियर रवाना हुए।

इतना तो कर ही सकते थे डॉक्टर
 सेंट्रल हॉस्पिटल में मौजूद डॉ.एस नौटियाल, डॉ.कलीम अकमल. डॉ. फिरोज समेत दूसरे चिकित्साधिकारी सिर्फ यही रट लगाए थे कि वे शव के लिए एंबुलेंस नहीं दे सकते चाहे कुछ भी हो जाए। उनके इस रवैये से मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी भी नाराज दिखे।


उनका कहना था कि डॉक्टर इतने बड़े सेंट्रल हॉस्पिटल की एक एंबुलेंस से कैलाश के शव को मेले से बाहर तक पहुंचा ही सकते थे। इतना भी नहीं तो शव को बाहर सड़क पर भेजने की बजाय गाड़ी का इंतजाम होने तक अस्पताल में ही रखवा देते। मगर डॉक्टर तो पुलिस की भी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे।
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