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हादसे के बाद इलाहाबाद के रेलवे स्टेश्ानों का हाल

Tue, 12 Feb 2013 11:59 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
इलाहाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 12 Feb 2013 11:59 AM IST
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condition of allahabad railway stations after stampede

मौनी अमावस्या स्नान में पहुंची भीड़ के बारे में अनुमान न लगा पाना सबसे बड़ी कमी साबित हो रही है। स्नान के लिए भीड़ चार से पांच दिनों में पहुंची लेकिन स्नान के बाद सभी को एक साथ छोड़ दिया गया। हालत यह हुई कि इलाहाबाद, प्रयाग, रामबाग, दारागंज, प्रयागघाट, नैनी और झूंसी रेलवे स्टेशनों पर इस कदर भीड़ पहुंच गई कि रेलवे की पूरी व्यवस्था चौपट हो गई।

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दो दिनों में इलाहाबाद से सोमवार की रात नौ बजे तक 101 ट्रेनें चलाई गईं लेकिन भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। अलबत्ता, घटना होने के बाद से स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या ज्यादा होने पर इंट्री बंद कर दी जा रही है। आलम यह है कि अगले 48 घंटों में लगातार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाए तो भीड़ को निकाला जा सकेगा।
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मौनी अमावस्या के लिए उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे ने 220 ट्रेनें चलाने की तैयारी की थी। यह ट्रेनें चार दिनों में चलनी थीं। रेलमंत्री का दावा किया कि ठसाठस भरने पर एक ट्रेन में 2500 यात्री आ सकते हैं। यानी, रेलवे ने करीब 5.50 लाख यात्रियों को लेकर जाने के इंतजाम किए। जबकि, मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दिन ही इससे ज्यादा भीड़ स्टेशनों पर पहुंच गई।
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दो दिनों में इलाहाबाद से 67, प्रयाग, प्रयागघाट से 23 और रामबाग से 10 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। इससे करीब ढाई से पौने तीन लाख यात्री ही निकाले जा सके। अनुमान है कि नियमित ट्रेनों से डेढ़ लाख यात्रियों को शहर के बाहर भेजा गया। इसके बाद भी सोमवार की शाम तक शहर के किसी भी स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं थी। रामबाग स्टेशन पर रात 10 बजे 20-22 हजार, प्रयाग में 25 हजार, प्रयागघाट में करीब 15 हजार यात्रियों की भीड़ होने का अनुमान है।

स्टेशनों में घुसने से रोके गए श्रद्धालु
स्टेशन परिसर में घुस चुकी भीड़ को बाहर निकालने के लिए रेलवे अफसरों के पसीने छूट गए। इलाहाबाद जंक्शन पर हादसा होने के बाद स्टेशनों पर रोकथाम शुरू कर दी गई। जंक्शन पर सिविल लाइंस और लीडर रोड से यात्रियों को घुसने में अड़चनें खड़ी की गईं। रामबाग में दिन में चार घंटे तक स्टेशन परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए। प्रयागघाट स्टेशन पर भी रोकथाम की गई।

सुपरफास्ट ट्रेनें बना दी गईं पैसेंजर
यात्रियों की भीड़ को निकालने के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों के संचालन के साथ ही नियमित ट्रेनों में डिब्बे बढ़ाए। फिर भी, भीड़ को काबू होता न देखकर लंबी दूरी की कई ट्रेनों को पैसेंजर ट्रेन के रूप में तब्दील कर दिया गया। रामबाग स्टेशन होकर वाराणसी जाने वाली शिवगंगा, चौरीचौरा, सिकंदराबाद-पटना एक्सप्रेस समेत अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों को भी वाराणसी तक सभी स्टेशनों पर रोका गया।


एसी कोच में भी बैठने की जगह नहीं
नियमित ट्रेनों के यात्रियों को भी महाकुंभ की भीड़ का शिकार होना पड़ा। हादसे के बाद रेलवे प्रशासन किसी तरह से भीड़ को हटाने के जुगाड़ में लग गया। जंक्शन पर रुकने वाली राजधानी एक्सप्रेस में भी यात्रियों को घुसा दिया गया। प्रयागराज, संगम, नौचंदी, चौरीचौरा, मथुरा एक्सप्रेस, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस के एसी कोचों में भी स्नानार्थी घुस गए। स्नानार्थियों ने स्लीपर कोचों के साथ एसी कोचों की बर्थ भी कब्जा ली। इसे लेकर यात्रियों से किचकिच भी हुई।

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