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गंगा के अस्तित्व को बचाने की कवायद शुरू

Thu, 24 Jan 2013 03:54 PM IST
महाकुंभ नगर/ब्यूरो
महाकुंभ नगर/ब्यूरो Updated Thu, 24 Jan 2013 03:54 PM IST
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campaign for save ganga will start from 25th
‘बांध बनाकर धारा रोकी, गिराया हमने गंगा का मान, झीलों और सुरंगों में कैद तड़प रहे माता के प्राण, ऐसे में ऐ भारत! बोलो कहां गया अब स्वाभिमान! बंधी, दबी, शोषित धारा में क्या सार्थक है कुंभ स्नान?’ इस संदेश के साथ गंगा के अस्तित्व को बचाने के लिए 25 जनवरी को कुंभ नगर से जन आंदोलन शुरू होगा। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए उत्तराखंड के चार धामों का एक प्रतिनिधिमंडल भी यहां पहुंच गया है। सांसद रेवती रमण सिंह के नेतृत्व में शुरू होने वाला यह आंदोलन गंगा किनारे बसे अन्य शहरों में चलाया जाएगा।
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हिमालय में मनेरी भाली, टिहरी, कोटेश्वर सहित 115 बांध बन जाने के कारण वहां कई स्थानों पर गंगा का अस्तित्व खत्म होने का संकट खड़ा हो गया है। अन्य कई परियोजनाओं से हिमालय पर्वत श्रृंखला पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए गंगा आह्वान समिति के तत्वावधान में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम के लोग लगातार इन परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं। इन लोगों ने गंगा को बचाने के लिए बाद में इलाहाबाद के सांसद रेवती रमण सिंह से भी संपर्क किया।
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मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में सांसद ने बताया कि उन्होंने उत्तराखंड में गंगा पर बनाए जा रहे बांधों का विरोध करते हुए लोकसभा में दो बार मामला उठा। इस पर लंबी बहस हुई और कई सांसद भी उनके साथ हैं लेकिन केंद्र सरकार इस मसले में आंख मूंदे है। इसलिए उत्तराखंड के लोगों के साथ जनआंदोलन करने का निर्णय लिया गया है। बताया कि 25 जनवरी को संगम नोज पर सुबह 11 बजे जन आंदोलन की शुरूआत होगी।
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उत्तराखंड से आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हेमंत ध्यानी ने कहा कि लोग गंगा के शुद्धीकरण की ही बात करते हैं, लेकिन जरूरत पहले गंगा के अस्तित्व को बचाने की है क्योंकि उत्तराखंड में अभी 150 के आसपास और बांध बनाए जाने हैं। गंगा की सहायक मंदाकिनी, अलकनंदा, भागीरथी नदियों पर भी कई बांधों का निर्माण प्रस्तावित है। ऐसा होने पर गंगा का अस्तित्व मिट जाएगा। कई स्थानों पर गंगा सुरंगों में कैद कर दी गईं हैं जिसकी वजह से भूस्खलन एवं जल स्रोत सूख रहे हैं। सरकार को जगाने के लिए अब जन आंदोलन ही विकल्प है।

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