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'ज्ञानदास को नहीं बुलाए तो शाही स्नान का बहिष्कार'
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jan 2013 08:47 AM IST
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छह अखाड़ों वाली अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास को मेले में बुलाने को लेकर बैरागियों ने हुंकार भरी है। उन्होंने प्रशासन से महंत ज्ञानदास को मेले में सम्मानपूर्वक बुलाने, शाही स्नान का निर्धारित रास्ता न बदलने और अखाड़ों को गंगा नहीं, संगम में स्नान कराने की भी मांग की है।
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रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनी अखाड़ों के श्रीमहंतों ने दो टूक कहा कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो वह दूसरे शाही स्नान का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने शनिवार को प्रशासन के साथ हुई बैठक में निरंजनी के सचिव महंत नरेंद्र गिरि पर निर्मोही के श्रीमहंत राजेंद्र दास को अपशब्द कहने का आरोप लगाते हुए उनसे माफी मांगने की भी मांग की।
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संतों के मुताबिक मेले की अव्यवस्थाओं पर लगाम के लिए महंत ज्ञानदास की मौजूदगी जरूरी है। उन्हें कुंभ नगर पहुंचने पर जुलूस के साथ अखाड़ों की छावनी तक लाया जाएगा। त्रिवेणी मार्ग स्थित चार संप्रदाय में बातचीत के दौरान जूना, अग्नि, आवाहन के सचिवों सहित अनी अखाड़ों के श्रीमहंतों के हस्ताक्षरयुक्त वह पत्र भी जारी किया किया गया, जिसे महंत ज्ञानदास को बुलाने के लिए भेजा गया है।
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बातचीत में चार संप्रदाय के श्रीमहंत फूलडोल दास, श्रीमहंत रासबिहारी दास, श्रीमहंत रामजी बापू, श्रीमहंत लखन दास, डाकोर खालसा के श्रीमहंत माधवाचार्य, निर्मोही अनी के श्रीमहंत रामकांत, श्रीमहंत राजेंद्र दास, दिगंबर अनी के श्रीमहंत कृष्णदास, श्रीमहंत रामकिशोर दास, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत जगन्नाथ दास आदि मौजूद थे।
वहीं महंत नरेंद्र गिरि ने किसी भी प्रकार के अपशब्द से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'मैं महंत ज्ञानदास को परिषद का अध्यक्ष नहीं मानता और इसीलिए उन्हें बतौर अध्यक्ष बुलाने का विरोध किया था, बाकी उन्हें बुलाना या न बुलाना बैरागियों का विषय है, इससे मेरा कोई लेना देना नहीं है।'