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महाकुंभ में मथुरा-ब्रज के कलाकारों ने खेली होली
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2013 11:45 AM IST
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श्री शंभु पंच अग्नि अखाड़े की ओर से सोमवार को कढ़ी पकौड़ी का भोग लगाने के साथ अखाड़े की धर्मध्वजा की तनी ‘रस्सी’ ढीली कर समापन की घोषणा की गई। इस मौके पर सेक्टर नौ स्थित बापू स्वामी गोपालानंद ब्रह्मचारी सेवा संस्थान के शिविर में अखाड़ा के सचिव स्वामी गोविंदानंद जी की पुस्तक ‘जगद्गुरु शंकराचार्य, मठआम्न्याय, मठ और सन्यासी अखाड़े’ का लोकार्पण हुआ। शाम को मथुरा एवं ब्रज के कलाकारों के बीच फूल और लठमार होली खेली गई।
सुबह अखाड़े के शिविर में धर्मध्वजा की तनी ढीली करने की प्रक्रिया विधि विधान से पूरी की गई। इसके बाद दोपहर में संस्थान शिविर में आयोजित कार्यक्रम में साधु-संतों ने कढ़ी पकौड़ी का भोग लगाया। इस अवसर पर अखाड़े के सभापति स्वामी गोपालानंद ब्रह्मचारी, सचिव स्वामी गोविंदानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने पुस्तक का लोकार्पण किया। महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने पुस्तक के बारे में विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि पुनर्मुद्रित इस पुस्तक में शंकराचार्य के जीवनसार के बारे में एवं आदि शंकराचार्य द्वारा चारों मठों की स्थापना के पश्चात उनकी आधारभूत व्यवस्था, उनमें सम्मिलित होने वाले, पठन-पाठन करने वाले ब्रह्मचारियों की शिक्षा व्यवस्था आदि का जिक्र विस्तार से किया गया है।
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उन्होंने बताया कि पुस्तक में वर्ष 1253 से 2001 तक के महाकुंभों में होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं का भी संक्षेप में उल्लेख किया गया है। पुस्तक का पुर्नमुद्रण डॉ.त्रिभुवन सिंह ने कराया है। इस मौके पर एडीजी पीएचक्यू सूर्य कुमार शुक्ला, एसपी पीएचक्यू दीपक भट्ट, एसपी गंगा नाथ आदि मौजूद थे।
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सुबह अखाड़े के शिविर में धर्मध्वजा की तनी ढीली करने की प्रक्रिया विधि विधान से पूरी की गई। इसके बाद दोपहर में संस्थान शिविर में आयोजित कार्यक्रम में साधु-संतों ने कढ़ी पकौड़ी का भोग लगाया। इस अवसर पर अखाड़े के सभापति स्वामी गोपालानंद ब्रह्मचारी, सचिव स्वामी गोविंदानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने पुस्तक का लोकार्पण किया। महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने पुस्तक के बारे में विस्तार से चर्चा की।
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उन्होंने बताया कि पुनर्मुद्रित इस पुस्तक में शंकराचार्य के जीवनसार के बारे में एवं आदि शंकराचार्य द्वारा चारों मठों की स्थापना के पश्चात उनकी आधारभूत व्यवस्था, उनमें सम्मिलित होने वाले, पठन-पाठन करने वाले ब्रह्मचारियों की शिक्षा व्यवस्था आदि का जिक्र विस्तार से किया गया है।
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उन्होंने बताया कि पुस्तक में वर्ष 1253 से 2001 तक के महाकुंभों में होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं का भी संक्षेप में उल्लेख किया गया है। पुस्तक का पुर्नमुद्रण डॉ.त्रिभुवन सिंह ने कराया है। इस मौके पर एडीजी पीएचक्यू सूर्य कुमार शुक्ला, एसपी पीएचक्यू दीपक भट्ट, एसपी गंगा नाथ आदि मौजूद थे।