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महाकुंभ : बौद्धों की संस्कृति देखने पहुंचे अमेरिकी
इलाहाबाद/रणविजय सिंह
Updated Wed, 30 Jan 2013 10:57 AM IST
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महाकुंभ में हिन्दू संस्कृति, समाज और देवी-देवताओं को जानने समझने को पहुंचे विदेशियों की कई टोलियां संगम के आसपास दिख रही हैं लेकिन अमेरिका से आए पर्यटकों का एक समूह ऐसा है जो इस चकाचौंध से अलग गौतम बुद्ध के बारे में जानने, उनसे जुड़े स्थलों को देखने, वहां से बुद्ध से जुड़ी सामग्री एकत्र करने में जुटा है।
बुद्ध के शांति के उपदेश उनके दिलोदिमाग पर गहरा असर कर रहे हैं। बुद्ध के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के फेर में जुटे अमेरिकियों ने संगम से दूर भीटा और कौशांबी में बौद्ध परिपथ में प्रस्तावित स्थलों का दौरा भी किया।
अमेरिका से आए ज्यादातर पर्यटक सारनाथ, वाराणसी, खजुराहो होकर संगमनगरी पहुंच रहे हैं। पर्यटक साधु-संतों की संगत में हैं। उनके शिविरों में अध्यात्म और योग की दीक्षा ले रहे हैं। इसमें यूएसए के ओंटोरियो, ऑस्टिन, वाशिंगटन डीसी से पहुंचे कई पर्यटक भगवान बुद्ध से प्रभावित हैं। दस दिन से इलाहाबाद, कौशांबी घूम रही गिलियन वीनर को बुद्ध के शांति के संदेश बहुत प्रभावित करते हैं। कई देशों में उनके सिद्धांतों को मानने वाले हैं। शांतिदूत के रूप में उनकी मूर्तियां दुनियाभर में विख्यात हैं। वह सारनाथ के रास्ते कुंभ क्षेत्र में पहुंची हैं। योग और अध्यात्म से प्रेरित वीनर अब हिन्दुत्व की धारा में बह रही हैं।
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अमेरिकी नागरिक निगेन प्लूमरिज बंगलौर से सिल्क के कपड़ों का आयात करती हैं। महाकुंभ के बारे में जानकर यहां पहुंची हैं लेकिन यहां आने के बाद वह संगम कम बुद्ध से जुड़े स्थलों की तलाश में ज्यादा समय बिता रही हैं। उनके दिमाग में भी बुद्ध और उनके उपदेश छाए हैं। टेक्सास के जेरेट विलियम सारनाथ होकर संगमनगरी पहुंचे हैं। वहां उन्हें पता चला कि इलाहाबाद और कौशांबी का नाम भी बौद्ध परिपथ में जोड़ने की बात चल रही है, इसलिए यहां के स्थल देखने भी आ गएष चेनडेनी मैगलिन स्वामी चिदानंद के शिविर में हैं।
पांच दिनों से संगम के किनारे घूम रही मैगलिन कहती हैं कि महाकुंभ में उन्हें ऊर्जा मिल रही है। वह संतों के योग और धूनि रमाने के तौर-तीरके से काफी प्रभावित हैं। यूएसए के पर्यटक ब्रेनी बताते हैं कि भारत आने वाले अमेरिकी श्रीलंका, इंडोनेशिया, वर्मा, नेपाल समेत बौद्ध धर्म से प्रसार वाले देशों में भी जाते हैं। वहां से पता चला कि भारत में गौतम बुद्ध से जुड़े कई स्थल हैं, इसलिए वे इन स्थलों की तलाश में यहां तक पहुंचे।
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बुद्ध के शांति के उपदेश उनके दिलोदिमाग पर गहरा असर कर रहे हैं। बुद्ध के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के फेर में जुटे अमेरिकियों ने संगम से दूर भीटा और कौशांबी में बौद्ध परिपथ में प्रस्तावित स्थलों का दौरा भी किया।
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अमेरिका से आए ज्यादातर पर्यटक सारनाथ, वाराणसी, खजुराहो होकर संगमनगरी पहुंच रहे हैं। पर्यटक साधु-संतों की संगत में हैं। उनके शिविरों में अध्यात्म और योग की दीक्षा ले रहे हैं। इसमें यूएसए के ओंटोरियो, ऑस्टिन, वाशिंगटन डीसी से पहुंचे कई पर्यटक भगवान बुद्ध से प्रभावित हैं। दस दिन से इलाहाबाद, कौशांबी घूम रही गिलियन वीनर को बुद्ध के शांति के संदेश बहुत प्रभावित करते हैं। कई देशों में उनके सिद्धांतों को मानने वाले हैं। शांतिदूत के रूप में उनकी मूर्तियां दुनियाभर में विख्यात हैं। वह सारनाथ के रास्ते कुंभ क्षेत्र में पहुंची हैं। योग और अध्यात्म से प्रेरित वीनर अब हिन्दुत्व की धारा में बह रही हैं।
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अमेरिकी नागरिक निगेन प्लूमरिज बंगलौर से सिल्क के कपड़ों का आयात करती हैं। महाकुंभ के बारे में जानकर यहां पहुंची हैं लेकिन यहां आने के बाद वह संगम कम बुद्ध से जुड़े स्थलों की तलाश में ज्यादा समय बिता रही हैं। उनके दिमाग में भी बुद्ध और उनके उपदेश छाए हैं। टेक्सास के जेरेट विलियम सारनाथ होकर संगमनगरी पहुंचे हैं। वहां उन्हें पता चला कि इलाहाबाद और कौशांबी का नाम भी बौद्ध परिपथ में जोड़ने की बात चल रही है, इसलिए यहां के स्थल देखने भी आ गएष चेनडेनी मैगलिन स्वामी चिदानंद के शिविर में हैं।
पांच दिनों से संगम के किनारे घूम रही मैगलिन कहती हैं कि महाकुंभ में उन्हें ऊर्जा मिल रही है। वह संतों के योग और धूनि रमाने के तौर-तीरके से काफी प्रभावित हैं। यूएसए के पर्यटक ब्रेनी बताते हैं कि भारत आने वाले अमेरिकी श्रीलंका, इंडोनेशिया, वर्मा, नेपाल समेत बौद्ध धर्म से प्रसार वाले देशों में भी जाते हैं। वहां से पता चला कि भारत में गौतम बुद्ध से जुड़े कई स्थल हैं, इसलिए वे इन स्थलों की तलाश में यहां तक पहुंचे।