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महाकुंभ में मातम, 41 की मौत, 50 घायल

Mon, 11 Feb 2013 02:13 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
इलाहाबाद/ब्यूरो Updated Mon, 11 Feb 2013 02:13 AM IST
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41 killed in allahabad station stampede

महाकुंभ में मौनी अमावस्या स्नान का महापर्व यहां आए

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दर्जनों लोगों के लिए काल बन गया। भगदड़ की दो अलग-अलग घटनाओं में रविवार को 41 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हो गए।

सुबह में महाकुंभ मेले में मची भगदड़ में चार जानें जाने के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया और नतीजा यह कि शाम को इलाहाबाद रेलवे जंक्शन का प्लेटफॉर्म नंबर छह बड़े हादसे का गवाह बना। लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने में असफल रेलवे प्रशासन की लापरवाही से 37 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। 50 से अधिक घायल हुए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जंक्शन रेलवे के प्लेटफार्म नंबर छह पर उतरने के लिए बने फुट ओवर ब्रिज पर भगदड़ मचने से यह हादसा हुआ। भीड़ पर काबू पाने के लिए रेलवे पुलिस ने लाठी फटकारी तो स्थिति और भयावह हो गई। सीढ़ियों से गिरे लोग एक दूसरे को रौंदते हुए निकले। मृतकों में आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं।

रविवार को मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए महाकुंभ में करोड़ों की भीड़ उमड़ी थी। जंक्शन रेलवे स्टेशन पर भी सुबह से लाखों की भीड़ थी। रात में ट्रेन पकड़ने के चक्कर में भीड़ का रेला जंक्शन पहुंचने लगा। प्लेटफार्मों पर पैर रखने की जगह भी नहीं बची थी।

प्लेटफार्म नंबर चार और छह पर पहुंचने के लिए फुटओवर ब्रिज से नीचे यात्रियों को उतारा जा रहा था। शाम करीब साढ़े छह बजे भीड़ में धक्कामुक्की हुई और सीढ़ी पर भगदड़ मच गई। भीड़ बेकाबू हुई तो रेलवे पुलिस ने आपा खो दिया। लाठी लेकर खड़े जवान भीड़ को पीटकर नियंत्रित करने लगे तो लोग कूदते-फांदते भागने लगे।

इसके बाद तो लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए गए। कोई सीढ़ी से कूद पड़ा तो कोई कदमों तले रौंद दिया गया। कुछ ही मिनट में प्लेटफार्म नंबर छह पर लाशें ही लाशें दिखाई देने लगीं। 17 महिलाओं की लाश ओवर ब्रिज के नीचे पड़ी थी जबकि एक बच्ची समेत सात लोगों की लाश सीढ़ियों के ऊपर पड़ी थी।

तीन घंटे बार रात सवा नौ बजे डीआरएम और अन्य अफसर पहुंचे तो यात्रियों का गुस्सा भड़क उठा। राजधानी समेत कई ट्रेनों को भीड़ ने रोक लिया। ट्रेनों में तोड़फोड़ भी की गई। देर रात तक प्लेटफार्म पर अफरातफरी का आलम रहा।

- जिन सीढ़ियों, फुटओवर ब्रिज और प्लेटफॉर्म पर भगदड़ मची वहां उस वक्त करीब 4000 लोग मौजूद थे।

शाही स्नान घाट पर भी मची भगदड़
शाही स्नान घाट पर सुबह दो घंटे में तीन बार भगदड़ की स्थिति बनी। दो बार अखाड़ों का जुलूस आने पर पुलिस ने स्नान घाट पर मौजूद भीड़ को धकेला तो तमाम महिलाएं-पुरुष एक-दूसरे पर गिरकर चोटिल हुए। करीब नौ बजे घाट के पास पड़े लोहे के एंगल में फंसकर गिरे लोग चीखे तो भगदड़ मच गई। इसमें एक महिला को बेहोशी की हालत में स्ट्रेचर पर उठाकर ले जाया गया। त्रिवेणी रोड बांध पर दिन में 11.30 बजे ट्रैक्टर और दो वीआईपी गाड़ियों के चलते मची भगदड़ में कई महिलाओं को चोट पहुंची। पुलिस ने जैसे-तैसे स्थिति संभाली।

पुलिस, प्रशासन और लापरवाही

इलाहाबाद प्रशासन, पुलिस और रेलवे अधिकारियों की संवेदनहीनता को मानवता कभी माफ नहीं कर सकेगी। इनकी लापरवाही के कारण दर्जनों जानें गईं। अव्यवस्था का शिकार रेलवे जंक्शन उन पुलिसवालों के हवाले था जो श्रद्धावान जनों से लाठी से बात कर रहे थे। यही नहीं, जब हादसा हो गया तब रेलवे के जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी थी वे मौके से भाग गए।

सच यह है कि दर्जन भर मौतें सिर्फ रेलवे के अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी से हुई। जख्मी महिलाएं प्लेटफार्म पर पड़ी तड़पती रहीं और तीन घंटे तक मदद नहीं पहुंची। छह लोग एक-एक कर प्लेटफार्म पर तड़प कर मर गए। अगर उन्हें समय से उपचार मिल जाता, उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो वे बच सकते थे।

महिलाएं और बच्चे चीखते रहे, लेकिन रेलवे प्रशासन जैसे वहां था ही नहीं। जिन घायलों के साथ और लोग थे वे खुद उन्हें उठाकर अस्पताल भागे, लेकिन जो जख्मी अपने घरवालों से अलग हुए वे प्लेटफॉर्म पर ही तड़प कर मर गए।

तीन घंटे तक रेलवे डीआरएम समेत कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जो दरोगा, सिपाही और टीटी थे वह डर की वजह से निकल गए। जब यात्रियों ने हंगामा शुरू किया तो रेलवे और पुलिस अधिकारी वहां से खिसक गए। साढ़े छह बजे हुए हादसे के बाद रात साढ़े नौ बजे लाशों को उठाने का इंतजाम हुआ।

हेल्प लाइन नंबर जारी
कुंभ मेले के दौरान दौरान इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में मृतकों और घायलों की सूचना के लिए उत्तर रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 011-23342954 और 011-23341072 पर फोन कर जानकारी ली जा सकती है।

कैसे मची भगदड़
शाम करीब सात बजे प्लेटफॉर्म नंबर 6 के ऊपर बने फुटओवर ब्रिज पर रेलिंग के अचानक टूटने से स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उस समय हजारों यात्री ट्रेन में चढ़ने के लिए फुटओवर ब्रिज पर मौजूद थे। करीब तीन घंटे तक स्टेशन पर इसी तरह की स्थिति बनी रही।

लाठीचार्ज भी बनी वजह
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो पुलिस के लाठीचार्ज के चलते यह हादसा हुआ। भीड़ को नियंत्रित करने के चक्कर में पुलिस ने लाठी भांजने की कोशिश की और इसी प्रक्रिया में भगदड़ मच गई। हालांकि डीआरएम हरिंदर राव का कहना है कि हादसा उस वक्त हुआ जब स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए यात्रियों को लाइन में लगने को कहा जा रहा था।

पीएम ने हादसे पर जताया शोक
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महाकुंभ में मची भगदड़ में लोगों के निधन पर शोक प्रकट किया। साथ ही उन्होंने रेलवे मंत्रालय को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। मनमोहन ने केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों को राहत कार्यों में मदद के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की सहायता करने का निर्देश दिया है।

पुलिस, प्रशासन और लापरवाही
- फुट ओवर ब्रिज से उतरने केदौरान हुई भगदड़, पुलिस के लाठी चलाने से बेकाबू हुए हालात।
- आधा दर्जन लोगों ने तड़प कर दम तोड़ा, तीन घंटे तक नहीं शुरू हुआ राहत कार्य।
- यात्रियों ने किया बवाल, ट्रेनों में तोड़फोड़, तीन घंट बाद पहुंचे अफसर।

सेक्टर-12 में भगदड़ की सूचना है। उस घटना में कितने लोगों की मौत हुई, ये जानकारी ली जा रही है। अभी एक ही मौत की खबर मिली है।-देवेश चतुर्वेदी, कमिश्नर, इलाहाबाद

थम नहीं रहे हादसे
14 जनवरी, 2011 : केरल के सबरीमाला के अयप्पा मंदिर के निकट भगदड़, 104 की मौत।
14 अप्रैल, 2010 : हरिद्वार में कुंभ में भगदड़, सात लोगों की मौत और 20 घायल।
4 मार्च, 2010 : यूपी के प्रतापगढ़ के मनगढ़ स्थित कृपालु जी महाराज के आश्रम में भंडारे के दौरान भगदड़, 63 की मौत।
25 जनवरी, 2005 : महाराष्ट्र के सतारा में धार्मिक समारोह में भगदड़ में 340 लोग मारे गए।
27 अगस्त, 2003 : नासिक में कुंभ मेले में बैरिकेड के टूटने के बाद भगदड़ में 39 मरे।
1989 : हरिद्वार कुंभ मेले में भगदड़ से 350 लोग तीर्थयात्री मारे गए।
1986 : हरिद्वार में भगदड़ में 50 श्रद्धालुओं की जान गई।
1984 : हरिद्वार में भगदड़ में 200 की मौत।
1954 : इलाहाबाद कुंभ मेले के दौरान मची भगदड़ में 800 की जान गई।

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