इस साल महाशिवरात्रि है बहुत ही खास, बने हैं कई दिव्य योग
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महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का दिन माना जाता है। शिव पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि महाशिवरात्रि की रात ही भगवान शिव प्रकट हुए थे।
महाशिवरात्रि ही वह दिन है जब भगवान शिव ने सागर मंथन से निकले हालाहल विष को पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। इसदिन ही भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा था।
इस साल महाशिवरात्रि पर वही दिव्य योग फिर से बन रहा है जैसा महाशिवरात्रि पर शिव के प्रकट होने और विवाह के दिन बना था।
गजब संयोग शिव के साथ विष्णु भी होंगे प्रसन्न
महाशिवरात्रि इस वर्ष गुरुवार के दिन है। गुरुवार गुरु यानी भगवान विष्णु की पूजा का दिन है। ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि महाशिवरात्रि और गुरुवार का संयोग बहुत ही शुभ फलदायी है।
इस अवसर पर भगवान शिव की पूजा से सुख-समृद्घि और पुण्य लाभ एक साथ प्राप्त किया जा सकता है। जो व्यक्ति भूमि, भवन एवं वाहन खरीदाना चाहते हैं उनके लिए यह शुभ योग है। नया कारोबार एवं नए संबंधों के लिए भी यह महाशिवरात्रि उत्तम है।
ग्रहों की विशेष स्थिति बनी है
शिवरात्रि को ज्ञानपर्व माना गया है। जिस प्रकार दीपावली लक्ष्मी प्राप्ति का योग बनाती है उसी प्रकार महारात्रि शक्ति के योग के लिये जानी गयी है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शिव पार्वती योग बन रहा है। यह बहुत ही शुभ योग माना गया है।
इस योग को शिवशक्ति और शंभूसती योग भी कहा जाता है। करीब 500 साल के बाद महाशिवरात्रि पर ग्रहों की विशेष स्थिति बनी है जिससे यह योग बना है।
इन चार राशियों के लिए खास है महाशिवरात्रि
डॉ मिश्रपुरी के अनुसार, महा शिवरात्रि की अर्द्धरात्रि में विशेष पूजा का विधान है। चार पहर पूजा करते हुए पहले प्रहर में दूध से, द्वितीय प्रहर में गन्ने के रस से, तृतीय प्रहर में गिलोय में तथा चतुर्थ प्रहर में गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए।
महाशिवरात्रि मेष, वृश्चिक, मिथुन और कन्या राशियों के लिये अत्यधिक फलदायी है।