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UP Election Result 2022: उन सीटों का हाल, जहां जीतने वाली पार्टी की बनती है सरकार, क्या सभी पर सटीक बैठेगा टोटका?
Thu, 10 Mar 2022 12:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 10 Mar 2022 12:56 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश चुनाव में एक टोटका यह रहा है कि जो पार्टी कासगंज, बेल्थरा रोड, बख्शी का तालाब, भरथना और बिधूना सीट पर जीत हासिल करती है, वही पार्टी राज्य में सरकार भी बनाती है। ऐसे में इन सीटों के आखिरी नतीजे आने तक अमर उजाला आपको इनका अपडेट देता रहेगा।
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योगी आदित्यनाथ, प्रियंका गांधी, मायावती और अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। शुरुआती रुझानों के हिसाब से राज्य में भाजपा एक बार फिर सत्ता में लौट रही है। फिलहाल रुझानों में पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि समाजवादी पार्टी उससे आधी सीटों पर ही बढ़त बना पाई है। इस बीच यूपी चुनाव के दो अहम टोटकों पर भी बात करना जरूरी है। पहले कहा जाता रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल में नोएडा जाता है, वह विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार झेलता है। उधर एक टोटका यह भी रहा है कि जो पार्टी कासगंज, बेल्थरा रोड, बख्शी का तालाब, भरथना और बिधूना सीट पर जीत हासिल करती है, वही पार्टी राज्य में सरकार भी बनाती है।
बता दें कि बलिया की बेल्थरा रोड सीट पर 2012 से चुनाव हो रहा है। 2012 में सपा की जबकि 2017 में भाजपा की जीत सीट से हुई थी। लखनऊ जिले की बख्शी का तालाब सीट भी 2012 में अस्तित्व में आई जहां पहला चुनाव सपा ने जीता और 2017 में भाजपा ने जीता। कासगंज सीट के लिए यह टोटका सबसे उपयुक्त साबित हुआ है। कासगंज की सीट सबसे पुरानी है। लेकिन पिछले चार चुनाव के नतीजे इस टोटके को मजबूत आवाज देते हैं। 2002 में यहां से सपा, 2007 में बसपा, 2012 में सपा और 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज की। इन्हीं सालों में इन्हीं पार्टियों की सरकारें प्रदेश में बनी। इसी तरह मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट का भी इतिहास है। यह सीट भी बहुत पुरानी है लेकिन पिछले चार चुनाव के नतीजे देखें तो 2002 में यहां से सपा, 2007 में बसपा, 2012 में सपा और फिर 2017 में भाजपा ने यह सीट जीती। यही हाल भरथना और बिधूना सीट पर भी रहा है।
अभी इन सीटों पर क्या हाल?
फिलहाल बेल्थरा रोड सीट पर भाजपा के छत्तू राम ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण प्रकाश पर बढ़त बनाई है। उधर लखनऊ की बख्शी का तालाब सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी योगेंद्र शुक्ला आगे हैं। इसी तरह कासगंज सीट पर भी भाजपा के देवेंद्र सिंह ने सपा के मानपाल सिंह से लगातार 11वें राउंड में बढ़त बनाई है। मेरठ की हस्तिनापुर सीट पर भाजपा के दिनेश खटीक छठे राउंड तक आगे हैं। वहीं, दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के योगेश वर्मा हैं। फिलहाल भरथना सीट पर भाजपा उम्मीदवार सिद्धार्थ शंकर आगे चल रहे हैं। उधर बिधूना सीट पर आखिरी जानकारी तक सपा उम्मीदवार रेखा वर्मा आगे चल रही थीं, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा प्रत्याशी रिया शाक्य हैं।
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नोएडा में मुख्यमंत्री के नहीं जाने के टोटके पर क्या?
इन सब टोटकों के बीच एक और चुनावी टोटका नोएडा जिले से जुड़ा हुआ है। नोएडा के बारे में कहा जाता है कि इस शहर का दौरा करने वाला व्यक्ति दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठता। 1985 से वीर बहादुर सिंह जब यूपी के मुख्यमंत्री थे तब से यह दाग नोएडा के माथे पर यह दाग है। राजनाथ सिंह और अखिलेश यादव ने तो कभी नोएडा की तरफ रुख ही नहीं किया। दोनों ने नोएडा से शुरू होने वाली योजनाओं का शिलान्यास या तो दिल्ली से किया या लखनऊ से किया।
अभी यूपी चुनावों के क्या नतीजे?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पांच साल के कार्यकाल में कई बार नोएडा जा चुके हैं। उधर अब तक आए रुझानों को भी देखा जाए तो यूपी में भाजपा 270 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सपा को सिर्फ 124 सीटों पर ही बढ़त मिली है। यानी नोएडा का टोटका अब जल्द ही टूटता नजर आ रहा है।
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बता दें कि बलिया की बेल्थरा रोड सीट पर 2012 से चुनाव हो रहा है। 2012 में सपा की जबकि 2017 में भाजपा की जीत सीट से हुई थी। लखनऊ जिले की बख्शी का तालाब सीट भी 2012 में अस्तित्व में आई जहां पहला चुनाव सपा ने जीता और 2017 में भाजपा ने जीता। कासगंज सीट के लिए यह टोटका सबसे उपयुक्त साबित हुआ है। कासगंज की सीट सबसे पुरानी है। लेकिन पिछले चार चुनाव के नतीजे इस टोटके को मजबूत आवाज देते हैं। 2002 में यहां से सपा, 2007 में बसपा, 2012 में सपा और 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज की। इन्हीं सालों में इन्हीं पार्टियों की सरकारें प्रदेश में बनी। इसी तरह मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट का भी इतिहास है। यह सीट भी बहुत पुरानी है लेकिन पिछले चार चुनाव के नतीजे देखें तो 2002 में यहां से सपा, 2007 में बसपा, 2012 में सपा और फिर 2017 में भाजपा ने यह सीट जीती। यही हाल भरथना और बिधूना सीट पर भी रहा है।
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अभी इन सीटों पर क्या हाल?
फिलहाल बेल्थरा रोड सीट पर भाजपा के छत्तू राम ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण प्रकाश पर बढ़त बनाई है। उधर लखनऊ की बख्शी का तालाब सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी योगेंद्र शुक्ला आगे हैं। इसी तरह कासगंज सीट पर भी भाजपा के देवेंद्र सिंह ने सपा के मानपाल सिंह से लगातार 11वें राउंड में बढ़त बनाई है। मेरठ की हस्तिनापुर सीट पर भाजपा के दिनेश खटीक छठे राउंड तक आगे हैं। वहीं, दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के योगेश वर्मा हैं। फिलहाल भरथना सीट पर भाजपा उम्मीदवार सिद्धार्थ शंकर आगे चल रहे हैं। उधर बिधूना सीट पर आखिरी जानकारी तक सपा उम्मीदवार रेखा वर्मा आगे चल रही थीं, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा प्रत्याशी रिया शाक्य हैं।
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नोएडा में मुख्यमंत्री के नहीं जाने के टोटके पर क्या?
इन सब टोटकों के बीच एक और चुनावी टोटका नोएडा जिले से जुड़ा हुआ है। नोएडा के बारे में कहा जाता है कि इस शहर का दौरा करने वाला व्यक्ति दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठता। 1985 से वीर बहादुर सिंह जब यूपी के मुख्यमंत्री थे तब से यह दाग नोएडा के माथे पर यह दाग है। राजनाथ सिंह और अखिलेश यादव ने तो कभी नोएडा की तरफ रुख ही नहीं किया। दोनों ने नोएडा से शुरू होने वाली योजनाओं का शिलान्यास या तो दिल्ली से किया या लखनऊ से किया।
अभी यूपी चुनावों के क्या नतीजे?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पांच साल के कार्यकाल में कई बार नोएडा जा चुके हैं। उधर अब तक आए रुझानों को भी देखा जाए तो यूपी में भाजपा 270 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सपा को सिर्फ 124 सीटों पर ही बढ़त मिली है। यानी नोएडा का टोटका अब जल्द ही टूटता नजर आ रहा है।