चतुर्थ श्रेणी की नौकरी के लिए लाइन में लगे 12 हजार इंजीनियर
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मध्यप्रदेश में चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगे गए तो आवेदकों की संख्या दस लाख पार कर गई। खास बात ये रही कि आवेदन करने वालों में 34 से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो विभिन्न विषयों में पीएचडी धारक हैं तो 12 हजार से ज्यादा बीटेक पा युवाओं ने भी इसके लिए आवेदन किया। मामला सामने आने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि राज्य में बेरोजगारी का आलम क्या है।
बता दें कि मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल की ओर से चतुर्थ श्रेणी चपरासी और चौकीदार के विभिन्न पदों के लिए काफी संख्या में आवेदन निकाले गए थे। नौकरी के लिए शैक्षिक योग्यता मात्र 10वीं पास रखी गई थी।
सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं में चार्म इस कदर देखने को मिला कि दस लाख से ज्यादा लोगों ने इसके लिए आवेदन कर दिया। इनमें काफी संख्या उन युवाओं की थी जो उच्च शैक्षिक योग्यता रखते थे। यहां तक की पीएचडी धारकों ने भी इस नौकरी के लिए अप्लाई किया। जिनकी संख्या 34 से ज्यादा थी।
इसके अलावा काफी संख्या में एमए, एमएससी और एमफिल पास युवाओं ने चतुर्थ श्रेणी की इस नौकरी के लिए आवेदन किया। लोग उस समय हैरत में रह गए जब 12 हजार के करीब बीटेक पास इंजीनियरों ने भी इस नौकरी के लिए आवेदन किया।
वहीं यह मामला सामने आने के बाद राज्य में विपक्षी कांग्रेस ने प्रदेश और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में पढ़े लिखे युवाओं का चतुर्थ श्रेणी नौकरी के लिए आवेदन करने से साफ पता चलता है कि राज्य और देश में बेरोजगारी का आलम क्या है। सरकार युवाओं को रोजगार दिलाने में पूरी तरह असफल रही है।
बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी सचिवालय में निकली चपरासी की 300 के करीब भर्ती के लिए 13 लाख से ज्यादा लगों ने आवेदन किया था। यहां भी बीटेक और पीएचडी धारकों ने बड़ी संख्या में आवेदन किया था।
कुछ ऐसा ही हाल महाराष्ट्र में भी रहा जहां कुली और सहायक के चुनिंदा पदों के लिए ढाई हजार से ज्यादा ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और एमफिल डिग्री धारकों ने आवेदन किया था। खास बात ये है कि इस भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता मात्र चौथी पास रखी गई थी।