मोदी के भरोसे कैसे मिशन 2019 पूरा कर पाएगी भाजपा, आंकड़े बयां करते हैं ये कहानी 

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 14 Dec 2018 06:45 PM IST
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भाजपा का मिशन 2019
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मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में करारी हार के बाद भाजपा के सामने कई सवाल हैं। सवाल है मिशन 2019 का। 2019 के आम चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहेगा? क्या भाजपा आम चुनाव में पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी? जाहिर है 2019 में नरेंद्र मोदी ही भाजपा का प्रमुख चेहरा होंगे, लेकिन क्या 2014 जैसा करिश्मा वह दोहरा पाएंगे? तीन राज्यों में हार ने भाजपा को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है और अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने पर भी मजबूर किया है। 
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बेशक नरेंद्र मोदी भाजपा में सबसे लोकप्रिय नेता हैं। भाजपा को वोट हासिल करने के लिए पीएम मोदी की जरूरत सबसे पहले पड़ती है। तीन राज्यों में उनके धुआंधार प्रचार इसी तस्दीक करते हैं। राहुल गांधी के एक ताकतवर नेता के रूप में उभरने के साथ-साथ मोदी पर भाजपा की निर्भरता भी बढ़ी है। लेकिन सवाल है कि 2019 में मोदी अपने दम पर भाजपा को कहां तक ले जाने में कामयाब रहेंगे? 
भाजपा ने जिन तीन राज्यों में सत्ता गंवाई है वहां उसने 2014 आम चुनाव में 65 में से 62 सीटें जीती थीं। विधानसभा चुनाव नतीजों के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो 2019 चुनाव में भाजपा को महज 31 सीटें मिलेंगी। यानि सीधे 31 सीटों का घाटा जो भाजपा के मिशन 2019 के लिए बड़ा रोड़ा साबित होगा।  

यूपी का चुनावी रण 

ऐसे में उसके लिए उत्तर प्रदेश सबसे अहम हो जाएगा जहां भाजपा ने 2014 में 71 सीटें और उसके सहयोगियों ने 2 सीटें जीती थीं। इस बार यहां पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर दारोमदार रहेगा। यूपी में योगी कितना रंग जमा पाए हैं इस पर अभी भी संशय है। पहली अग्निपरीक्षा में वह नाकाम साबित हुए हैं। उनके सीएम रहते पार्टी लोकसभा उपचुनाव में दो बड़ी सीटें गंवा चुकी है। गोरखपुर सीट खुद उनकी थी और फूलपुर सीट पर डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य काबिज थे। दोनों सीटें हाथ से गईं। उधर कैराना सीट भी भाजपा ने गंवा दी। 
अगर यूपी में माया-अखिलेश साथ आ जाते हैं तो भाजपा के लिए पिछले प्रदर्शन का आधा भी दोहरा पाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे हालात में पीएम मोदी का जादू भी बेअसर रहेगा। यानि, भाजपा उस हिंदी बेल्ट में ही बैकफुट पर जाती दिख रही है, जिसने उसे सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। मिशन 2019 को अंजाम तक पहुंचाने के लिए भाजपा को मोदी के जादू का ही सहारा है क्योंकि तीन राज्यों में हार के बाद महागठबंधन आकार लेने लगा है।   

 
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