फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   delhi high court order t stop cutting trees til 4 july in delhi

दिल्ली हाईकोर्ट ने 16,500 पेड़ काटने पर 4 जुलाई तक लगाई रोक, आप ने किया फैसले का स्वागत

Mon, 25 Jun 2018 11:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 25 Jun 2018 11:40 PM IST
विज्ञापन
delhi high court order t stop cutting trees til 4 july in delhi
पेड़

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 4 जुलाई तक 16,500 पेड़ों को न काटने की सलाह दी। इस तरह से विकास के नाम पर काटे जा रहे हजारों पेड़ अब 4 जुलाई तक नहीं काटे जाएंगे। साथ ही कोर्ट ने ये भी आदेश दिया है जब तक इस मामले की सुनवाई हो रही है सरकारी संस्थाएं कोई कार्रवाई न करें।दिल्ली हाईकोर्ट ने एनबीसीसी से सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या दिल्ली सड़कों और इमारतों के विकास के लिए पेड़ों के कटना झेल सकती है। कोर्ट ने ये भी कहा कि चार जुलाई तक कोई पेड़ न काटे जाएं।

विज्ञापन


इस मामले में एनजीटी 2 जुलाई को सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि यह पेड़ दक्षिण दिल्ली की सात कॉलोनियों के विकास के लिए काटे जा रहे हैं।

हाईकोर्ट में साउथ दिल्ली इलाके में पेड़ों की कटाई के मुद्दे को लेकर याचिका दायर हुई थी। इसमें पेड़ों की कटाई के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी को गलत बताया गया है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में पर्यावरण मंत्रालय समेत अन्य विभागों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। पीठ ने इस मामले में त्वरित सुनवाई के लिए सोमवार यानि 25 जून की तारीख मुकर्रर की थी।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया है कि विकासात्मक कार्य के लिए 2500 पेड़ों की कटाई के संबंध में दी गई मंजूरी गलत तरीके से दी गई। साथ ही दावा किया गया  है कि शुक्रवार को ही दिल्ली में छह जगहों पर पेड़ काटे गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामले में संज्ञान लेते हुए होईकोर्ट ने काटे गए पेड़ों के फोटो मांगे हैं। याचिका में नेताजी सुभाष नगर, सरोजिनी नगर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर में पेड़ काटे जाने की बात कही गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, एनबीसीसी, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय समेत अन्य विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि पीठ ने इस मामले में निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इंकार किया है। इसी संबंध में एनजीटी में भी याचिका दायर हो चुकी है।            

आप ने किया फैसले का स्वागत

delhi high court order t stop cutting trees til 4 july in delhi
सौरभ भारद्वाज
आम आदमी पार्टी (आप) ने आज दक्षिण दिल्ली में केन्द्र सरकार की पुनर्विकास योजनाओं को रोकने की मांग करते हुए कहा कि इसका शहर पर ‘‘प्रलयकारी’’ प्रभाव होगा। आप ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पुनर्विकास परियोजना के लिए पेड़ों को काटने पर रोक का स्वागत करते हुये यह मांग की और कहा कि दिल्ली की उसकी सरकार किसी और पेड़ को कटने नहीं देगी।

आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘‘भाजपा नेता इस मुद्दे से भाग रहे हैं। अगर वे पेड़ों को बचाना चाहते हैं तो केन्द्र द्वारा यह परियोजना रोकनी चाहिए।’ दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज पूछा कि राष्ट्रीय राजधानी एक आवासीय परियोजना के लिए 16500 से अधिक पेड़ काटने का बोझ कैसे झेल सकती है। अदालत के नजरिये पर संज्ञान लेते हुए पुनर्विकास परियोजना का जिम्मा संभाल रही संस्था ‘नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन’ (एनबीसीसी) ने चार जुलाई तक कोई पेड़ नहीं काटने पर सहमति जताई।

भारद्वाज ने कहा कि अदालत ने दिल्ली सरकार को इस मामले में एक पक्षकार बनने की अनुमति भी दी है। उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार न केवल पेड़ काटने के लिए मिली अनुमति वापस लेने का प्रयास करेगी बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करेगी कि पेड़ काटने के लिए नयी अनुमति नहीं दी जाये।’’ भारद्वाज ने कहा कि उपराज्यपाल ने ‘‘बड़ी संख्या में’’ पेड़ काटने की अनुमति दी और इसकी कुल संख्या 16 हजार से 17 हजार के बीच है।

उन्होंने आशंका जताई कि परियोजना का उद्देश्य नौकरशाहों को घर उपलब्ध कराने के बजाय ‘‘वाणिज्यिक’’ है। आप प्रवक्ता ने कहा कि अगर पेड़ काटने को टाला नहीं जा सकता तो केन्द्र को परियोजना को गुड़गांव, नोएडा, रोहिणी या द्वारका जैसे किसी अन्य जगह पर स्थानान्तरित करना चाहिये।

  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed