फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   BJP appoints Nityanand Rai as Bihar unit president

बिहार में पिछड़ों को भाजपा से जोड़ना नित्यानंद की चुनौती

Thu, 01 Dec 2016 04:25 AM IST
आशीष झा
आशीष झा Updated Thu, 01 Dec 2016 04:25 AM IST
विज्ञापन
 BJP appoints Nityanand Rai as Bihar unit president
बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय - फोटो : Social Media
उजियारपुर के सांसद नित्यानंद राय को बिहार प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे निवर्तमान अध्यक्ष मंगल पांडेय का स्थान ग्रहण करेंगे। राय का कार्यकाल जनवरी 2018 तक होगा।
विज्ञापन


मंगल पांडेय के विकल्प रूप में नित्यानंद राय का चुना जाना भाजपा के अंदर एक पीढ़ी ही नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव को भी दिखाता है। सवर्ण की पार्टी कही जाने वाली भाजपा से पिछड़ों को जोड़ना नित्यानंद की सबसे बड़ी चुनौती होगी। वैसे तो नित्यानंद बिहार के तीसरे यादव हैं जो प्रदेश अध्यक्ष बने हैं।
विज्ञापन


इससे पहले जगदंबी प्रसाद यादव और नंद किशोर यादव प्रदेश भाजपा की कमान संभाल चुके हैं। लेकिन तीनों अध्यक्षों के कार्यकाल में सामाजिक और राजनीतिक बनावट अलग-अलग रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


नित्यानंद राय उस दौर में प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, जब प्रदेश भाजपा में सवर्ण नेता हाशिये पर हैं और पिछड़ा जमात भाजपा से बिदका हुआ है। यहीं कारण है कि कुछ राजनीतिक जानकार यह भी कह रहे हैं कि राय को जिम्मेदारी सौंपना विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए गए बयान की क्षति-पूर्ति है।

दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में ही केंद्रीय नेतृत्व को अहसास हो गया कि बिहार की राजनीति में पिछड़े वोटों में सेंधमारी के बगैर सत्ता में आना संभव नहीं है। यादव वोटों का झुकाव लालू यादव के साथ है। ऐसी स्थिति में पिछड़े वोटों में सेंधमारी के लिए भाजपा की रणनीति साफ है।
Trending Videos

जिला अध्यक्षों का चुनाव न होकर मनोनयन

 BJP appoints Nityanand Rai as Bihar unit president
फाइल फोटोः अमित शाह
उनका मानना है कि भागवत के बयान के बाद दूसरे दलों के दामन थाम चुके पिछड़ी जाति के लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी आलाकमान ने बिहार में इस समुदाय से दो लोगों को अहम पद पर बैठाने जैसा कदम उठाया है। पहले डॉ. प्रेम कुमार को विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाकर पिछड़ों को मनाने की कोशिश की थी और अब उसने प्रदेश की कमान नित्यानंद राय के हाथों में सौंपकर एक दूसरा राजनीतिक प्रयोग किया है।

इतना ही नहीं पार्टी ने जिला अध्यक्षों की सूची में भी सवर्णों की संख्या पहले से काफी कम कर दी। यही कारण रहा कि इस बार जिला अध्यक्षों का चुनाव न होकर उनका मनोनयन हुआ।

पार्टी ने प्रदेश में पिछड़ी जाति के लोगों में अपनी पैठ मजबूत करने की दिशा में पहली बार ऐसा कदम नहीं उठाया है। इसके पहले भी जब देश में मंडल-कमंडल का दौर था, तब भी बिहार में भाजपा ने ऐसे प्रयोग किए थे। उस समय भी पिछड़ी जाति के लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी ने नंदकिशोर यादव को प्रदेश इकाई की कमान सौंपी थी। 

नंद किशोर लाख प्रयास के बावजूद यादव वोटों में सेंधमारी नहीं लगा पाए। इसलिए हाजीपुर के कर्णपुर गांव के निवासी नित्यानंद राय की सफलता भी ‘यादव वोटों में सेंधमारी’ से ही आंकी जाएगी। इसके अलावा भी उनके सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कम उम्र के होने के कारण नित्यानंद राय को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भरोसा पाना होगा, जो आसान नहीं है। 

चार बार चुनाव जीत चुके और विधानसभा चुनाव के दौरान मुजफ्फरपुर में प्रधानमंत्री के लिए आयोजित चुनावी सभा का संचालन का जिम्मा भी संभालने के बावजूद नित्यानंद राय राज्य स्तर के नेता नहीं हैं। ऐसे में पार्टी के अंदर जड़ जमा चुकी गुटबाजी को खत्म करना उनके लिए चुनौती होगी।  वैसे प्रदेश के युवा कार्यकर्ताओं में जोश और विश्वास उनके अध्यक्ष बनने से जरूर बढ़ने वाला है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed