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मोदी-ट्रंप बातचीत में नहीं उठा एच-1बी वीजा का मुद्दा
एजेंसी/ वाशिंगटन
Updated Wed, 28 Jun 2017 05:19 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली मुलाकात के दौरान एच-1बी वीजा का मुद्दा नहीं उठा। विदेश सचिव एस जयशंकर से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या मोदी और ट्रंप के बीच एच-1बी के मुद्दे पर बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की आपसी और बिजनेस लीडर्स से बातचीत में डिजिटल पार्टनरशिप पर काफी बातें हुईं। लेकिन एच-1बी वीजा का मुद्दा नहीं उठा।
जयशंकर ने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका और भारत के दोनों देशों के समुदायों की भूमिका की अहमियत रेखांकित की गई। उन्होंने कहा ‘अगर आपसी बातचीत में इस भूमिका के महत्व को समझा जा रहा है तो इसका मतलब यह है कि आगे भी इसे महत्व मिलेगा।’
भारतीय समुदाय में एच-1बी से जुड़े मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन के सुधारों से बड़ी चिंता है। इससे जुड़े नियमों की समीक्षा से एच-1बी वीजा में कटौतियों की आशंका बढ़ गई है। भारतीय आईटी इंजीनियर बड़ी तादाद में इस वीजा पर अमेरिका नौकरी करने जाते हैं। उम्मीद की जा रही थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप से अपनी मुलाकात में यह मुद्दा उठाएंगे। लेकिन ट्रंप और मोदी की मुलाकात के बाद जारी किए संयुक्त बयान में एच-1बी मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था।
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इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप की तारीफ
व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि भारत और अमेरिका दोनों ने इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को अपनाया है। सिलिकन वैली दोनों समुदायों के लोगों ने लगभग यहां की 15 फीसदी स्टार्ट-अप की नींव रखी है। इस समुदाय के लोगों ने पेंटियम चिप, फाइबर ऑप्टिक्स और शोर को दूर रखने वाले हेडफोन समेत कई चीजें ईजाद की हैं।
आगे क्या होगा, पता नहीं
ट्रंप प्रशासन अमेरिका में वर्क और इमिग्रेशन को लेकर कुछ एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तख्त दिए थे। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि वीजा आवेदन या इसे जारी करने के प्रक्रिया में अभी कोई फौरी बदलाव नहीं हुआ है लेकिन आगे क्या होगा कहा नहीं जा सकता।
भारतीयों की चिंता बरकरार
ट्रंप की मौजूदा ‘हायर अमेरिकन’ नीति की वजह से भारतीयों में एच-1बी वीजा को लेकर खासी चिंता है। सबसे ज्यादा एच-1बी वीजा भारतीयों के लिए जारी होते हैं।
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जयशंकर ने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका और भारत के दोनों देशों के समुदायों की भूमिका की अहमियत रेखांकित की गई। उन्होंने कहा ‘अगर आपसी बातचीत में इस भूमिका के महत्व को समझा जा रहा है तो इसका मतलब यह है कि आगे भी इसे महत्व मिलेगा।’
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भारतीय समुदाय में एच-1बी से जुड़े मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन के सुधारों से बड़ी चिंता है। इससे जुड़े नियमों की समीक्षा से एच-1बी वीजा में कटौतियों की आशंका बढ़ गई है। भारतीय आईटी इंजीनियर बड़ी तादाद में इस वीजा पर अमेरिका नौकरी करने जाते हैं। उम्मीद की जा रही थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप से अपनी मुलाकात में यह मुद्दा उठाएंगे। लेकिन ट्रंप और मोदी की मुलाकात के बाद जारी किए संयुक्त बयान में एच-1बी मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था।
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इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप की तारीफ
व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि भारत और अमेरिका दोनों ने इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को अपनाया है। सिलिकन वैली दोनों समुदायों के लोगों ने लगभग यहां की 15 फीसदी स्टार्ट-अप की नींव रखी है। इस समुदाय के लोगों ने पेंटियम चिप, फाइबर ऑप्टिक्स और शोर को दूर रखने वाले हेडफोन समेत कई चीजें ईजाद की हैं।
आगे क्या होगा, पता नहीं
ट्रंप प्रशासन अमेरिका में वर्क और इमिग्रेशन को लेकर कुछ एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तख्त दिए थे। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि वीजा आवेदन या इसे जारी करने के प्रक्रिया में अभी कोई फौरी बदलाव नहीं हुआ है लेकिन आगे क्या होगा कहा नहीं जा सकता।
भारतीयों की चिंता बरकरार
ट्रंप की मौजूदा ‘हायर अमेरिकन’ नीति की वजह से भारतीयों में एच-1बी वीजा को लेकर खासी चिंता है। सबसे ज्यादा एच-1बी वीजा भारतीयों के लिए जारी होते हैं।