मुंबई में अब मास स्क्रीनिंग कराने की तैयारी, हालात नियंत्रण में आने की उम्मीद
- शुरुआत में बढ़ सकता हैं मरीजों का आकड़ाः मलिक
- बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के जोन-5 में मॉस स्क्रिनिंग
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मुंबई में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के जोन-5 में मास स्क्रीनिंग कराया जाएगा। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों को बाहर निकाला जाएगा।
इससे शुरुआत में कोरोना मरीजों के आकड़े बढ़ेंगे, लेकिन उसके बाद परिस्थिति नियंत्रण में आ जाएगी। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री व मुंबई एनसीपी अध्यक्ष नवाब मलिक ने यह जानकारी दी। देश के सर्वाधिक कोरोना प्रभावित जोन-5 को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी मलिक को सौपी गई है।
मुंबई में शुक्रवार को जोन-5 में बीएमसी के सभी वार्ड अधिकारियों के साथ मलिक ने बैठक की। बैठक में तय हुआ कि सभी हाउसिंग सोसाइटियों में परिपत्र भेजा जाएगा। हाउसिंग सोसाइटी को वहां रहने वालों की स्क्रिनिंग खुद करानी होगी।
उनके शरीर का तापमान, ऑक्सीजन लेवल आदि की जांच की जाएगी। जबकि झुग्गी बस्ती यानि चाल में रहने वालों के लिए मास स्क्रीनिंग की व्यवस्था बीएमसी करेगी। इसके लिए सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों की मदद ली जाएगी।
मलिक ने बताया कि फिलहाल, तीन वार्ड में मास स्क्रीनिंग शुरू हो गई है। इसके बाद बड़े पैमाने पर मरीज सामने आएंगे। इन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा। फिलहाल, तीन वार्ड में 300 बेड उपलब्ध हैं।
इससे पहले आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि पूरी मुंबई में कोविड-19 की मास स्क्रीनिंग कराई जाए लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।
मुंबई के जोन-5 में रहते हैं 35 लाख लोग
मुंबई के जोन-5 में करीब 35 लाख लोग रहते हैं। इस जोन में चांदिवली, कुर्ला, नेहरूनगर, चेंबूर, मानखुर्द-गोवंडी और अणुशक्तिनगर आदि विधानसभा आती है। यहां 100 फीसदी लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग कराने की योजना है। मलिक ने बताया कि बीएमसी जब निजी अस्पतालों को अपने अधिकार में लेगी, तब वहां भर्ती मरीजों के इलाज का खर्च बीएमसी वहन करेगी।
कोरोना के खिलाफ बनेगा मोहल्ला रक्षक दल
मंत्री मलिक ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जनसहभागिता जरूरी है। इसके लिए मोहल्ला रक्षक दल बनाने की जरूरत है, जो पुलिस के साथ मिल कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा सकें। उन्होंने बताया कि मस्जिद व मदरसों में स्थान उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, जिससे अल्पसंख्यक समाज के लोगों को वहां क्वारंटीन किया जा सके।