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महाराष्ट्रः मराठा आरक्षण नहीं मिला तो बनेंगे नक्सली, संभाजी ब्रिगेड ने दी चेतावनी

Sat, 12 Sep 2020 07:27 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 12 Sep 2020 07:27 PM IST
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Maharashtra: Sambhaji Brigade warns if delay in Maratha reservation will become Naxalite
vikas pasalkar, sambhaji brigade - फोटो : Vikas Pasalkar (Twitter)

महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए एक मराठा, लाख मराठा की आवाज बुलंद कर लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरकर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नाक में दम कर देने वाला मराठा समाज एक बार फिर आक्रामक हो गया है। मराठा आरक्षण को लेकर संभाजी ब्रिगेड ने शनिवार को पुणे में प्रेसवार्ता कर सरकार को चेतावनी दी कि आरक्षण नहीं मिला तो मराठा नक्सलवाद की राह पर चल पड़ेंगे।

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संभाजी ब्रिगेड के अध्यक्ष विकास पासलकर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की राजनीति में मराठा आरक्षण की बलि ली जा रही है। राज्य सरकार तत्काल मराठा आरक्षण पर अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे। अगर इसका जल्द समाधान नहीं निकला तो मराठा नक्सलवाद की राह पकड़ेंगे।
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संभाजी ब्रिग्रेड ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने में नाकाम साबित हुई है। वहीं, केंद्र सरकार से सवाल किया कि जो सरकार अनुच्छेद 370 खत्म कर सकती है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है और तीन तलाक खत्म कर सकती है वह मराठा आरक्षण क्यों नहीं दे सकती।
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विकास पासलकर ने कहा कि हर चुनाव में मराठा आरक्षण का झुनझुना थमाया जाता है लेकिन आज तक मुकम्मल आरक्षण नहीं मिल सका। अगर राज्य की सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दल भाजपा मिलकर प्रयास करे तो मराठा आरक्षण मिलने में कोई कठिनाई नहीं आएगी।

महाराष्ट्र में लंबे समय से हो रही है मराठा आरक्षण की मांग

महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग लंबे समय से हो रही है। साल 2018 में राज्य सरकार ने कानून बनाया और मराठा समाज को शिक्षा संस्थान और सरकारी नौकरियों में 16 फीसदी आरक्षण दे दिया। जून 2019 में बांबे हाईकोर्ट ने शिक्षा में 12 फीसदी और नौकरी में 13 फीसदी आरक्षण तय किया।



हाईकोर्ट ने कहा कि अपवाद के तौर पर सुप्रीम कोर्ट आरक्षण की सीमा पार की जा सकती है। उसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो इंदिरा साहनी केस या मंडल कमीशन का हवाला देते हुए तीन जजों की बेंच ने साल 2020-2021 के लिए शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर रोक लगा दी।

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