{"_id":"5bdaad9cbdec2269b3459a21","slug":"maharashtra-hit-by-swine-flu-302-people-died-and-325-admitted-in-hospital-for-treatment","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महाराष्ट्र में स्वाइन फ्लू का कहर, 302 लोगों की मौत और 325 मरीज अस्पताल में भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महाराष्ट्र में स्वाइन फ्लू का कहर, 302 लोगों की मौत और 325 मरीज अस्पताल में भर्ती
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Updated Thu, 01 Nov 2018 01:09 PM IST
विज्ञापन
SWINE FLU
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वाइन फ्लू ने इस साल सबसे ज्यादा कहर महाराष्ट्र में बरपाया है। पूरे देश में जहां स्वाइन फ्लू के ज्यादा मामले दर्ज हुए वहीं महाराष्ट्र में संक्रमण का भयावह रूप देखने को मिला। इस साल सिर्फ महाराष्ट्र में अब तक स्वाइन फ्लू से 302 मौतें हो चुकी हैं और एच1एन1 से संक्रमित 325 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक में स्थिति सबसे ज्यादा भयावह है। स्वास्थ विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो महीने में सबसे ज्यादा एच1एन1 संक्रमण के मामले सामने आये हैं। नासिक में सबसे ज्यादा 76 मौतें हुई हैं जबकि पुणे सिटी में 64, पिंपरी छिंछवाड़ में 33 लोगों की मौत हुई है जबकि सतारा में 28 और कोल्हापुर 17 मौतें स्वाइन फ्लू की वजह से हुई है।
महाराष्ट्र के स्वास्थ विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है ताकि लक्षण दिखने पर लोग फौरन डॉक्टारों से संपर्क करें। महराष्ट्र में पूरा स्वास्थ महकमा इस महामारी से बचने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है। एक राज्य सर्विलांस अधिकारी के मुताबिक 325 लोग अभी भी अस्पताल में हैं जिनमें से 22 से 23 मरीज वेंटिलेटर पर हैं और इनकी हालत काफी गंभीर है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य जानकारों के मुताबिक ज्यादा बारिश और रात और दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से स्वाइन फ्लू से संक्रमण के मामलों में इतना इजाफा देखने को मिला है। लेकिन वक्त पर इलाज ना मिलने की वजह से इतनी मौतें हुई हैं।
एच1एन1 ने पिछले वर्षों की तुलना में साल 2017 में ज्यादा प्रभावित किया। 2017 में स्वाइन फ्लू की वजह से 777 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 2009 में स्वाइन फ्लू की महामारी के बाद से 2015 राज्य के लिए सबसे खराब साल था, जब इस जानलेवा वायरस ने 905 जिंदगियां छीन ली थीं।
विज्ञापन
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक में स्थिति सबसे ज्यादा भयावह है। स्वास्थ विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो महीने में सबसे ज्यादा एच1एन1 संक्रमण के मामले सामने आये हैं। नासिक में सबसे ज्यादा 76 मौतें हुई हैं जबकि पुणे सिटी में 64, पिंपरी छिंछवाड़ में 33 लोगों की मौत हुई है जबकि सतारा में 28 और कोल्हापुर 17 मौतें स्वाइन फ्लू की वजह से हुई है।
विज्ञापन
महाराष्ट्र के स्वास्थ विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है ताकि लक्षण दिखने पर लोग फौरन डॉक्टारों से संपर्क करें। महराष्ट्र में पूरा स्वास्थ महकमा इस महामारी से बचने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है। एक राज्य सर्विलांस अधिकारी के मुताबिक 325 लोग अभी भी अस्पताल में हैं जिनमें से 22 से 23 मरीज वेंटिलेटर पर हैं और इनकी हालत काफी गंभीर है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य जानकारों के मुताबिक ज्यादा बारिश और रात और दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से स्वाइन फ्लू से संक्रमण के मामलों में इतना इजाफा देखने को मिला है। लेकिन वक्त पर इलाज ना मिलने की वजह से इतनी मौतें हुई हैं।
एच1एन1 ने पिछले वर्षों की तुलना में साल 2017 में ज्यादा प्रभावित किया। 2017 में स्वाइन फ्लू की वजह से 777 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 2009 में स्वाइन फ्लू की महामारी के बाद से 2015 राज्य के लिए सबसे खराब साल था, जब इस जानलेवा वायरस ने 905 जिंदगियां छीन ली थीं।
swine flu
जानलेवा होता है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक वायरल बुखार है जो एच1एन1 वायरस से फैलता है। बारिश के मौसम में ये वायरस सबसे ज्यादा पाया जाता है और संक्रमण होने की संभावना भी ज्यादा होती है। वातावरण में नमी बढ़ने की वजह से ये वायरस आसानी से बढ़ता है और तेजी से फैलता है। यही वजह है कि मौसम बदलने के साथ एकाएक इसके मामलों की बाढ़ सी आ गई है। बारिश के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो फौरन डॉक्टर से मिलें और एच1एन1 की जांच कराएं।
एच1एन1 का अटैक
स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है और खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है।
स्वाइन फ्लू की समस्या ज्यादातर उन लोगों को होती है , जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
इसके आसान टारगेट पहले से बीमार चल रहे मरीज, गर्भवती महिलाएं आदि होते हैं।
घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया हो तो,बाकी लोगों को भी इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेकर दवा खा लेनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचाव ही इसे रोकना का सबसे बड़ा उपाय है।
संक्रमण से बचने के लिए आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।
डॉक्टर से इलाज जरूरी
बुखार तीन से ऊपर हो जाए तो डॉक्टर से जरूर मिलें।बीमारी के बढ़ने पर ऐंटी-वायरल दवा टैमी फ्लू और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है। लेकिन इन दवाओं को कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए।
सर्दी-जुखाम जैसे लक्षणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तुलसी, गिलोए, कपूर, लहसुन, ऐलोवियरा, आंवला जैसी आयुर्वेदिक दवाईयों का भी स्वाइन फ्लू के इलाज को भी कारगर पाया गया है।
बचाव ही उपाय
किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम 3 फीट की दूरी बनाए रखें।
स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे छूए नहीं।
बहुत जरूरत पड़ने पर मास्क का प्रयोग करके ही मरीज के पास जाना चाहिए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उस व्यक्ति से हाथ न मिलाये और गले न मिलें ।
स्वाइन फ्लू का टीका अवश्य लगवाएं
हाथों को हमेशा साबुन और पानी से करीब 20 सेकंड तक अच्छी तरह से धोएं।
स्वाइन फ्लू एक वायरल बुखार है जो एच1एन1 वायरस से फैलता है। बारिश के मौसम में ये वायरस सबसे ज्यादा पाया जाता है और संक्रमण होने की संभावना भी ज्यादा होती है। वातावरण में नमी बढ़ने की वजह से ये वायरस आसानी से बढ़ता है और तेजी से फैलता है। यही वजह है कि मौसम बदलने के साथ एकाएक इसके मामलों की बाढ़ सी आ गई है। बारिश के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो फौरन डॉक्टर से मिलें और एच1एन1 की जांच कराएं।
एच1एन1 का अटैक
स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है और खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है।
स्वाइन फ्लू की समस्या ज्यादातर उन लोगों को होती है , जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
इसके आसान टारगेट पहले से बीमार चल रहे मरीज, गर्भवती महिलाएं आदि होते हैं।
घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया हो तो,बाकी लोगों को भी इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेकर दवा खा लेनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचाव ही इसे रोकना का सबसे बड़ा उपाय है।
संक्रमण से बचने के लिए आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।
डॉक्टर से इलाज जरूरी
बुखार तीन से ऊपर हो जाए तो डॉक्टर से जरूर मिलें।बीमारी के बढ़ने पर ऐंटी-वायरल दवा टैमी फ्लू और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है। लेकिन इन दवाओं को कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए।
सर्दी-जुखाम जैसे लक्षणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तुलसी, गिलोए, कपूर, लहसुन, ऐलोवियरा, आंवला जैसी आयुर्वेदिक दवाईयों का भी स्वाइन फ्लू के इलाज को भी कारगर पाया गया है।
बचाव ही उपाय
किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम 3 फीट की दूरी बनाए रखें।
स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे छूए नहीं।
बहुत जरूरत पड़ने पर मास्क का प्रयोग करके ही मरीज के पास जाना चाहिए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उस व्यक्ति से हाथ न मिलाये और गले न मिलें ।
स्वाइन फ्लू का टीका अवश्य लगवाएं
हाथों को हमेशा साबुन और पानी से करीब 20 सेकंड तक अच्छी तरह से धोएं।