मुंबई में कोरोना के साथ अब पड़ेगी मौसम की मार, भारी बारिश का अलर्ट
- जून के पहले ही हफ्ते में मसूलाधार बारिश की चेतावनी
- हर साल मानसून जून के दूसरे सप्ताह में दस्तक देता है
- मजदूर न होने से नाला सफाई का काम धीमी गति से चालू
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कोरोना संक्रमण से बेहाल मुंबई में अब मौसम की भी मार पड़ने वाली है। जून महीने के पहले हफ्ते में यहां तेज वर्षा की चेतावनी दी गई है, जिससे मुंबई पर दोहरी मार पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
वैसे तो मुंबई में हर साल मानसून जून के दूसरे सप्ताह में दस्तक देता है, लेकिन इस बार 2 से 4 जून के बीच में ही जोदार बारिश की चेतावनी दी गई है।
मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली संस्था स्काईमेट संस्था के प्रमुख महेश पलावत ने मुंबई में भारी बारिश के संबंध में चेतावनी दी है। उन्होंने ट्वीट किया है कि अरब सागर में डीप डिप्रेशन का एक क्षेत्र बन रहा है।
इससे मानसून को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इसके चलते मुंबई में मानसून से पहले ही यानि 2 से 4 जून के बीच जोरदार बारिश हो सकती है। मुंबई में हर साल कई बार भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के साथ लोगों को बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों से भी जूझना पड़ेगा।
मानसून पूर्व तैयारियों में गत वर्ष खर्च हुए थे 120 करोड़
मुंबई में कोरोना महामारी के कारण मानसून पूर्व की तैयारियां नहीं हो पाई हैं। बीएमसी में भाजपा के प्रभारी पार्षद भालचंद शिरसाट कहते हैं कि पिछले साल नाला-सफाई आदि के लिए 120 करोड़ की निविदा जारी हुई थी।
लेकिन इस साल मीठी नदी के अलावा बड़े नालों में इरला नाला की थोड़ी सफाई हो पाई है। नाला सफाई धीमी गति से चालु है क्योंकि मजदूर ही नहीं है। वहीं, सड़क मरम्मत का काम भी अधूरा है।
सड़क के किनारे के नालों की सफाई अभी तक नहीं हो पाई है। झुग्गी-झोपड़ियों के छोटे नालों की सफाई मुश्किल लग रही है। मुंबई राम भरोसे है। कोरोना और बारिश दोनो आपदा में मुंबईवासियों को पिसना है।
इस बार फिर डूबेगी मुंबई - रविराजा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में विपक्ष के नेता रविराजा का कहना है कि मानसून पूर्व की तैयारी का काम इस साल 30 फीसदी भी नहीं हुआ है।
लेकिन अधिकारी 90 फीसदी काम पूरा होने के दावे करते हैं। इस साल भी 150 करोड़ की निविदा जारी हुई है फिर भी मुंबई डूबेगी।
साल 2005 में मुंबई में आई भीषण बाढ़ के बाद प्रशासन ने नहीं चेता। मुंबई में कई नाले ऐसे हैं जहां मशीन नहीं जा सकती। फ्लडिंग स्पॉट से लेकर ड्रेनेज भी साफ नहीं हुआ है।
नाला-ड्रेनेज सफाई का काम 12 महीने होना चाहिए। बीते तीन महीने से कोरोना संक्रमण के चलते वैसे ही मुंबई बेहाल है।