कोरोना संकटः खतरे में महाराष्ट्र की औद्योगिक पहचान, उद्योगों को नहीं मिल रहे मजदूर
- जान जोखिम में डाल कर भागे 11 लाख प्रवासी, वापसी की उम्मीद नहीं
- संगठित क्षेत्र में साढ़े 28 लाख श्रमिक, राज्य में करीब 30 लाख प्रवासी श्रमिक
- राज्य में 64 हजार 500 उद्योगों में से 35 हजार उद्योग शुरू
- दवा, टेक्सटाइल्स, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर व सर्विस सेक्टर में यूपी-बिहार के लोगों की खासी संख्या
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विश्वव्यापी कोरोना संक्रमण महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कहर बरपा रहा है। महाराष्ट्र औद्योगिक प्रदेश के रूप में जाना जाता है। किन्तु, कोरोना वायरस से राज्य की औद्योगिक पहचान भी खतरे में पड़ गई है।
अब तक महाराष्ट्र से करीब 11 लाख प्रवासी श्रमिक अपने गांव जा चुके हैं। लॉकडाउन में सब बंद हैं। इससे कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए है। वहीं, लॉकडाउन 3.0 घोषित होने पर जिस तरह जान जोखिम में डालकर मजदूर गांव चले हैं उससे उनके वापसी की उम्मीद भी कम ही दिखाई दे रही है।
महाराष्ट्र में टेक्सटाइल्स, कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर लघु व मध्यम औद्योगिक इकाइयों में लोगों को सर्वाधिक रोजगार मिलता है। स्मॉल स्केल इंडस्ट्री में हुनर की जरूरत होती है जबकि कपड़ा, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे उद्योग हैं जहां कम पढ़े लिखे लोगों को भी रोजगार मिल जाता है।
दवा, टेक्सटाइल्स, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर व सर्विस सेक्टर इंडस्ट्री में यूपी-बिहार के लोगों की खासी संख्या है। महाराष्ट्र में अप्रैल से जून तक बहुत ही कम काम होता है। इन महीनों में प्रवासी कामगार वापस गांव लौटते रहे हैं।
इसलिए यह तय ही था कि प्रवासी कामगार लौटेंगे, पर इस अवधि के लिए भी उन्हें कुछ पैसा इस वजह से मिल जाता था कि वे लौट कर फिर आएं। इस बार यह बात नहीं है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के एक अधिकारी के मुताबिक राज्य में 64 हजार 500 उद्योगों में से 35 हजार उद्योग शुरू हैं।
लेकिन उन औद्योगिक क्षेत्रों में अभी से ही पांच लाख श्रमिकों की कमी हो गई है। महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त महेंद्र कल्याणपुरकर कहते हैं कि संगठित क्षेत्र में साढ़े 28 लाख श्रमिक हैं, जहां कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन प्रवासियों के पलायन से असंगठित क्षेत्र में दिक्कतें हो सकती हैं।
इस तरह गांव की ओर चले प्रवासी श्रमिक
- 7.5 लाख श्रमिक पैदल, निजी वाहन और ट्रकों में बैठकर रवाना हुए
- 2.5 लाख प्रवासियों को रेलवे ने पहुंचाया
- 1लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों को राज्य परिवहन की 750 बसों ने एमपी की सीमा तक पहुंचाया
एक साल तक नहीं संभलेगा कपड़ा उद्योग- केडिया
भारत मर्चेंट चेंबर के चेयरमैन प्रकाश केडिया ने कहा कि कोराना संकट के कारण कपड़ा उद्योग एक साल तक नहीं संभल पाएगा। महाराष्ट्र के बोइसर, भिवंडी और इचलकरंजी के टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में लगभाग 50 लाख लोग काम करते हैं।
इसमें से करीब 20 लाख श्रमिक यूपी और बिहार के हैं। श्रमिकों के पलायन और बाजार की मंदी के कारण कपड़ा उद्योग भारी संकट में है।
भारी तकलीफ में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर- आनंद गुप्ता
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आनंद गुप्ता ने कहा कि रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री काफी तकलीफ में है। राज्य में करीब 30 लाख प्रवासी श्रमिक काम करते हैं।
इनके पलायन से दिक्कतें बढ़ी हैं। महाराष्ट्र में इन दोनों सेक्टर में 5 करोड़ लोग काम करते हैं, जिसमें से अब तक 65 फीसदी प्रवासी श्रमिक गांव जा चुके हैं सिर्फ 35 फीसदी श्रमिक बचे हैं।
श्रमिकों को चाहिए काम फिर लौटेंगे प्रवासी - वैद्य
चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईएमसी) के अध्यक्ष आशीष वैद्य कहते हैं कि एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ की घोषणा काबिले तारीफ है।
देश में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र के कुल 6 करोड़ और महाराष्ट्र में 50 लाख यूनिट्स हैं। यहां कुल 11 करोड़ लोग काम करते हैं। कोई बिना काम के नहीं रह सकता। हमें उम्मीद है कि श्रमिक पुनः लौटेंगे।