फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Relationship ›   Know what is maturity principle

कच्ची उम्र में या तो बच्चे बिगड़ जाते हैं या उम्र भर के लिए संभल जाते हैं, क्या ये सच है?

Sun, 01 Jul 2018 10:19 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 01 Jul 2018 10:19 AM IST
विज्ञापन
Know what is maturity principle
किशोरावस्था सबसे नाजुक उम्र होती है। लोग इसे कच्ची उम्र भी कहते हैं। यही उम्र होती जब इंसान का शरीर और दिमाग बालिग होने की ओर कदम बढ़ाते हैं। मां-बाप के लिए ये उम्र चिंता का विषय भी होती है। कहा जाता है कि इस उम्र में या तो बच्चे बिगड़ जाते हैं या उम्र भर के लिए संभल जाते हैं। इस उम्र में बच्चों के शरीर में बहुत तरह के बदलाव हो रहे होते हैं जिनका उनके व्यवहार और किरदार पर गहरा असर पड़ता है। ब्रिटिश न्यूरोसाइंटिस्ट सारा जेन ब्लेकमूर के मुताबिक इस उम्र में बच्चों में बहुत तरह के हार्मोनल और तंत्रिका संबंधी बदलाव हो रहे होते हैं। ये परिवर्तन ही आगे चल कर उनका व्यक्तित्व बनाते हैं।
विज्ञापन


ये वक़्त बचपने से निकल कर शोख और चंचल उम्र में दाखिल होने का दौर होता है। इस उम्र में सबसे बड़ा बदलाव तो यही होता है कि बच्चे अपना बचपन छोड़कर मैच्योरिटी की तरफ बढ़ने लगते हैं। उनकी सोच में ठहराव और नजरिया बदलने लगता है।
विज्ञापन

व्यक्तित्व में ऐसे ही बदलाव उस वक़्त भी आते हैं जब किशोरावस्था से प्रौढ़ता की तरफ बढ़ते हैं। लंबे समय तक की गई रिसर्च से पता चलता है कि किशोरावस्था में शख़्सियत के जो पहलू सामने आते हैं, उसी से बहुत हद तक अंदाजा हो जाता है कि आगे चलकर आप किस क्षेत्र में कितने कामयाब होने वाले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


किशोरावस्था में बदलती शख़्सियत के पहलुओं पर अभी रिसर्च शुरूआती दौर में हैं लेकिन, उम्मीद है कि इससे बच्चों को अच्छा, कामयाब और संस्कारी व्यक्तित्व बनाने में सहायता मिलेगी। बचपन और वयस्क होने के बीच के दौर में शख़्सियत में बदलाव आना नई बात नहीं है। अगर हम अपनी तमाम उम्र का सफ़र देखें तो उम्र के हर पड़ाव पर कुछ ना कुछ बदलाव होते रहते हैं। जब हम अपना गुस्सा काबू करने लगते हैं। अपने बर्ताव पर नियंत्रण यानी सेल्फ कंट्रोल बढ़ने लगता है। रिश्तों की बारीकियां समझने लगते हैं, तो, कहा जाता है अब हम बड़े हो गए हैं। मनोवैज्ञानिक इसे 'मैच्योरिटी प्रिंसिपल' कहते हैं। इसी तरह जब हम बुढ़ापे की तरफ बढ़ते हैं तो हम ज़्यादा विनम्र हो जाते हैं।

 

साल 2005 में नीदरलैंड में हजारों किशोरों पर एक रिसर्च की गई। रिसर्च में शामिल बच्चों में सबसे कम उम्र वाला बच्चा बारह साल का था। करीब छह सात साल तक इन बच्चों का हर साल पर्सनैलिटी टेस्ट किया गया। इसमें पाया गया कि लड़कों में शुरूआती किशोरावस्था में जिम्मेदारी का एहसास, समय की पाबंदी और आत्म अनुशासन में गिरावट आई है। वहीं लड़कियों में थोड़े वक़्त के लिए जज़्बाती असंतुलन बढ़ा है।

रिसर्च के दौरान इस उम्र में बच्चों के मूड में उतार चढ़ाव भी बहुत ज़्यादा देखे गए। लेकिन अच्छी बात ये रही कि ये सब कुछ थोड़े वक़्त के लिए ही था। किशोरावस्था का आखिरी पड़ाव आने तक बच्चों में उनके किरदार के पॉजिटिव गुण लौटने लगे। साल 2017 में जर्मनी की एक रिसर्च के मुताबिक किशोरों और माता-पिता दोनों ने इस बात को स्वीकारा है कि बढ़ती उम्र के साथ मानसिक, शारीरिक और व्यक्तित्व संबंधी बदलाव आते हैं। लेकिन, इन बदलावों को कौन लोग देख रहे हैं ये बात ज़्यादा अहम है। मिसाल के लिए इस रिसर्च में शामिल बच्चों के मिजाज में आए बदलावों को 11 और 14 साल की उम्र में जांचा गया।

बच्चों और माता-पिता दोनों की राय पूछी गई। किशोरों की राय थी कि वो पहले से ज़्यादा खुल कर बोलने लगे हैं। जबकि, माता-पिता के मुताबिक उनके बच्चे कम बोलने वाले और ग़ैर जिम्मेदार हो गए हैं। अपनी मनमर्ज़ी चलाने लगे हैं। पहली नजर में बच्चों और माता-पिता की राय विरोधाभासी लगती हैं। लेकिन, इसका एक सकारात्मक पहलू ये है कि इस उम्र में बच्चों और मां-बाप के रिश्ते में बदलाव आता है। बच्चों को अपनी प्राइवेसी की चिंता सताने लगती है। किशोरों और उनके माता-पिता की राय में अंतर की एक वजह ये भी है कि मां-बाप बच्चों को वयस्कों के बरअक्स खड़ा करके देखते हैं। जबकि बच्चे अपने अंदर हो रहे बदलावों को अपने ही हम-उम्र बच्चों के साथ देखते हैं।

किशोरावस्था में बदलते मिजाज पर कई तरह की रिसर्च के नतीजे सामने आ चुके हैं। सभी में बहुत सी बातों पर सहमति है। लेकिन, ये बदलाव सभी किशोरों में समान हों, ये जरूरी नहीं है। अलग-अलग किशोरों में शख़्सियत के बदलाव के लिए माहौल और उनके जीन्स कितना और कैसा असर डालते हैं इस पर भी रिसर्च जारी है।
 

2018 में किशोरों की ब्रेन मैपिंग के लिए एक स्टडी की गई, जिसमें ये पता लगाने की कोशिश की गई कि इस उम्र के बच्चों में सीखने की क्षमता और पर्सनेलिटी के ग्रे एरिया में किस तरह के बदलाव आते हैं। रिसर्च में करीब दर्जन भर बच्चे शामिल हुए थे। ढाई साल में दो बार इन बच्चों की ब्रेन मैपिंग की गई। पाया गया कि इस उम्र में बच्चों के दिमाग के कई हिस्सों में तेजी से बदलाव होते हैं जो उन्हें मैच्योरिटी के लिए तैयार करते हैं और उनमें भावनात्मक ठहराव लाते हैं।

2017 में अमरीका में की गई रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि किशोरावस्था में बच्चों को तनाव भी जल्दी होता है, जिसका उनके मिजाज पर प्रभाव उम्र भर के लिए होता है। मिसाल के लिए अगर इस उम्र में बच्चे अपने मां-बाप के बीच झगड़े या तलाक देखते हैं तो, ये उनके जहन में रिश्तों के लिए नकारात्मक सोच तैयार करता है। इस उम्र में अगर उनका भरोसा टूटता है तो इसका असर काफ़ी वक़्त तक रहता है जो कि पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के लिए अच्छा नहीं है। तनाव के समय अगर किशोरों को जज़्बाती सहारा दिया जाए तो, उनमें हमेशा के लिए पनपने वाली नकारात्मक सोच को खत्म किया जा सकता है।

ऐसा नहीं है कि किशोरावस्था में सिर्फ़ नकारात्मक बदलाव ही आते हैं। इस उम्र में पर्सनैलिटी डेवेलपमेंट के लिए बहुत से सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। किशोरों में अपनी जिम्मेदारी संभालने का एहसास बढ़ने लगता है और जिन किशोरों में ये एहसास गहरा होता है, वो आगे चलकर करियर और रिश्ते दोनों में कामयाब होते हैं। एक ब्रिटिश स्टडी के मुताबिक़ जिन किशोरों में ज़िम्मेदारी का एहसास कम होता है वो अक्सर बेरोजगारी का शिकार होते हैं।

बच्चों की शख़्सियत बनाने और निखारने में इस तरह की रिसर्च काफ़ी मददगार हैं। इससे एक बात तो साफ हो ही जाती है कि हमें अपने बच्चों के मिजाज को पहचान कर उसके मुताबिक ही उनके साथ व्यवहार करना चाहिए। अगर मां-बाप और बच्चों की सोच में टकराव होगा तो इसका नुकसान बच्चे को ही होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed