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Hindi News ›   Lifestyle ›   Relationship ›   Fathers day 2021 know How much has the relationship between father and child changed in the last decades

फादर्स डे 2021: अमर उजाला की पहल में जानें, बीते दशकों में कितना बदला पिता और संतान का रिश्ता?

Sun, 20 Jun 2021 12:12 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 20 Jun 2021 12:12 PM IST
सार

'फादर्स डे' के खास मौके पर अमर उजाला की ओर से होने वाली चर्चा में भाजपा नेता मनोज तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता बरखा त्रेहन और मनोरोग विशेषज्ञ अमन किशोर शामिल हैं। 

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Fathers day 2021 know How much has the relationship between father and child changed in the last decades
फादर्स डे 2021 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पिता और बच्चों का रिश्ता एक अलग  प्रकार का, लेकिन विशेष रिश्ता होता है, जिसे समझने की जरूरत होती है। इंसान के जीवन में यह एकमात्र ऐसा रिश्ता होता है, जो पूरे जीवन में सिर्फ एक बार ही मिलता है। जब बच्चे छोटे होते हैं तो जिस तरह से पिता उनकी हर बात का ख्याल रखते हैं, उनकी हर कमी को पूरी करते हैं, ठीक वैसे ही बच्चों का भी फर्ज होता है कि वो भी बड़े होने पर पिता का हर तरह से ख्याल रखें। जैसे गांवों में एक कहावत प्रचलित है, 'जब बाप का जूता बेटे के पैर में आने लगे तो बाप को चाहिए कि बेटे के साथ दोस्ताना व्यवहार करे'। यही बात बच्चों को भी समझनी चाहिए और पिता के साथ ऐसा रिश्ता बनाना चाहिए, जिससे उन्हें लगे नहीं कि वो बच्चों के रहते हुए भी अकेले हो गए हैं। 

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हालांकि बीते कुछ दशकों में ये रिश्ता थोड़ा कमजोर हुआ है और इसकी कई वजहें हैं। चूंकि आज 'फादर्स डे' है, इसलिए इस खास मौके पर अमर उजाला की ओर से एक चर्चा हो रही है, जिसमें बताया जा रहा है कि बीते दशकों में पिता और संतान का रिश्ता कितना बदला है? इस चर्चा में भाजपा सांसद मनोज तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता बरखा त्रेहन और मनोरोग विशेषज्ञ अमन किशोर शामिल हैं। आप भी इस चर्चा में जुड़ सकते हैं और अपने सवाल पूछ सकते हैं। 
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लाइव चर्चा से ऐसे हो सकते हैं रूबरू 

बता दें कि फादर्स डे से संबंधित सवालों के जवाब जानने के लिए आपको बस अमर उजाला के फेसबुक पेज (https://www.facebook.com/Amarujala/), ट्विटर हैंडल (https://twitter.com/AmarUjalaNews/) या यूट्यूब चैनल (https://www.youtube.com/watch?v=fo3VTI1zPO0) पर आना होगा। 


'पुत्र को पिता का भक्त होना चाहिए' 

पिता और पुत्र के रिश्ते को लेकर आचार्य चाणक्य कहते हैं कि 'पुत्र वही है, जो पिता का भक्त है'। इसका मतलब है कि पुत्र को हमेशा अपने पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए। आचार्य चाणक्य के मुताबिक, सही मायने में पुत्र वही है, जो अपने पिता की आज्ञा मानता हो और सदा उनकी बातों का अनुसरण करे और पिता का भी यह कर्तव्य होता है कि वह अपनी संतान की शिक्षा, भरण-पोषण और आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखे। 

दरअसल, बच्चों के जीवन में पिता के मार्गदर्शन की बहुत जरूरत होती है। उनके साये में बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक संतान में परिवार के अच्छे संस्कार, अच्छा व्यक्तित्व, अच्छे विचार, अच्छी आदतें और स्वभाव पिता से ही आते हैं। पिता के संरक्षण में बच्चे निरंतर कुछ न कुछ सीखते ही हैं। हालांकि आज के समय में ऐसा देखने को मिलता है कि बच्चों को पिता की रोक-टोक और सख्ती अच्छी नहीं लगती। यही कारण है कि उनके रिश्तों में दूरियां भी बढ़ रही हैं। इसलिए यह जरूरी है कि पिता और संतान, दोनों ही एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और एक मजबूत और स्थिर रिश्ता बनाएं। 

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