हार्ट हेल्थ: महिलाओं के लिए कितना खतरनाक है स्ट्रेस, ये रिपोर्ट खोल देगी आपकी आंख; जानलेवा समस्याओं का भी खतरा
Stress And Heart Disease: लगातार तनाव महिलाओं के दिल की सेहत को प्रभावित कर सकता है। कुछ अध्ययनों में तनाव के दौरान दिल तक खून का प्रवाह घटने और खून के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ने के संकेत मिले हैं। एससीएडी जैसी गंभीर बीमारी से भी हार्ट अटैक हो सकता है।
विस्तार
सेहत का ख्याल रखने की बात आती है तो हम सभी शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की कोशिशों में लग जाते हैं, पर क्या आप अपने मेंटल हेल्थ की ओर ध्यान देते हैं? ये सवाल इसलिए उठता है क्योंकि कई अध्ययन इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसमें से एक में भी होने वाली समस्या का असर दूसरे स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लगातार स्ट्रेस बने रहने जैसी स्थितियां भी दीर्घकालिक रूप में सेहत पर असर डाल सकती हैं, महिला और पुरुष दोनों को इस दिशा में गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
देखा जाता रहा है कि महिलाएं अक्सर घर, परिवार, बच्चों और काम की जिम्मेदारियों के बीच अपनी परेशानियों को नजरअंदाज कर देती हैं। पैसों की चिंता हो या किसी अपने को खोने का दुख, तनाव जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार तनाव दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है? खासकर महिलाओं के मामले में इसके असर को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
आखिर तनाव महिलाओं के दिल को कैसे प्रभावित करता है और बिना सीने में दर्द के भी हार्ट अटैक कैसे आ जाता है? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
महिलाओं में स्ट्रेस के कारण होने वाली दिक्कतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पुरुष हो या महिला लगातार स्ट्रेस में रहना किसी की भी सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। क्रॉनिक स्ट्रेस को शरीर और मन, दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक पाया गया है। लेकिन कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि दिल की सेहत के मामले में तनाव का असर महिलाओं पर पुरुषों की तुलना में ज्यादा गंभीर हो सकता है।
अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी में साल 2014 में एक अध्ययन किया गया था। इसमें दिल की बीमारी से जूझ रहे 310 लोगों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में रखकर उनके शरीर पर पड़ने वाले असर को समझने की कोशिश की गई।
- जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि तनाव की स्थिति में महिलाओं के दिल तक पहुंचने वाले खून का संचार कम होने की आशंका ज्यादा थी।
- साथ ही, उनके खून में प्लेटलेट्स के आपस में चिपकने की प्रक्रिया भी बढ़ सकती थी।
प्लेटलेट्स खून में मौजूद छोटी-छोटी कोशिकाओं जैसी संरचनाएं होती हैं, जो चोट लगने पर खून का बहना रोकने के लिए थक्का बनाने में मदद करती हैं। लेकिन जब खून में जरूरत से ज्यादा थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, तो इससे रक्त वाहिकाओं में रुकावट पैदा हो सकती है।
दिल तक खून कम पहुंचना और खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ना, दोनों ही हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है।
तनाव का असर सिर्फ दिल तक खून पहुंचने या खून के थक्के बनने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति को भी ट्रिगर कर सकता है, जिसे स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन (एससीएडी) कहा जाता है।
आसान भाषा में समझें तो इस स्थिति में दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों की अंदरूनी दीवार में अचानक दरार या चीरा पड़ जाता है। इससे खून धमनी की दीवार की परतों के बीच पहुंच सकता है और खून के सामान्य प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकता है। नतीजतन, दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और हार्ट अटैक हो सकता है।
कभी-कभी यह समस्या अचानक गंभीर शारीरिक या भावनात्मक तनाव के बाद सामने आ सकती है। उदाहरण के लिए, भारी वजन उठाना या किसी बेहद करीबी व्यक्ति को खोने का गहरा सदमा।
- ऐसी परिस्थितियों में शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं।
- तनाव के दौरान इनका अचानक बढ़ना दिल और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है। यदि धमनी की दीवार कमजोर हो, तो ऐसी स्थिति समस्या को बढ़ा सकती है।
एससीएडी के ज्यादातर मामले महिलाओं में क्यों सामने आते हैं?
स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन के मामलों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, एससीएडी के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत तक हो सकती है। ये स्थिति युवा से लेकर बुजुर्ग तक किसी भी उम्र की महिला में देखी जा सकती है।
महिलाओं में दिल और उसके आसपास की रक्त वाहिकाओं की बनावट तथा उनकी संरचना से जुड़े अंतर इस बीमारी को समझने में अहम हो सकते हैं।
- इस बीमारी की एक खास बात यह भी है कि यह उन महिलाओं में हार्ट अटैक का प्रमुख कारण बन सकती है, जिनमें आमतौर पर दिल की बीमारियों के सामान्य जोखिम कारक जैसे कोलेस्ट्रॉल की ज्यादा दिक्कतें नहीं होती हैं।
- यानी किसी महिला का ब्लड प्रेशर सामान्य हो, कोलेस्ट्रॉल ठीक हो और उसे डायबिटीज भी न हो, तब भी एससीएडी के कारण उसमें हार्ट अटैक होने की आशंका बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, इन जोखिमों को देखते हुए सभी महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर खास सावधानी बरतते रहना चाहिए। आमतौर पर हम स्ट्रेस को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते हैं पर जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं वो बताती हैं कि क्रॉनिक स्ट्रेस कई बार जानलेवा स्वास्थ्य स्थितियों को बढ़ाने वाली भी हो सकती है, यही कारण है कि सभी लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थय को लेकर भी अलर्ट रहना चाहिए।
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स्रोत:
Sex Differences in Platelet Reactivity and Cardiovascular and Psychological Response to Mental Stress in Patients With Stable Ischemic Heart Disease: Insights From the REMIT Study
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