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Exclusive: यूनिसेफ के हेल्थ एक्सपर्ट के साथ अमर उजाला की खास बातचीत, बोले-'महामारी से लड़ने में अच्छे स्वास्थ्य की बड़ी भूमिका'

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Tue, 26 Apr 2022 02:01 PM IST
सार

यूनिसेफ इंडिया और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'कोविड-19 न्यू मैसेजिंग एंड इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई 4.0)' विषय पर मीडिया ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आयोजन किया। इस दौरान यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक वीरेंद्र सिंह के साथ अमर उजाला की खास बातचीत हुई।

यूनिसेफ के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ विवेक सिंह के साथ अमर उजाला की खास बातचीत
यूनिसेफ के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ विवेक सिंह के साथ अमर उजाला की खास बातचीत - फोटो : Twitter/@UNICEFIndia
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विस्तार

यूनिसेफ इंडिया और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 'कोविड-19 न्यू मैसेजिंग एंड इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई 4.0)' विषय पर मीडिया ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस दौरान यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक वीरेंद्र सिंह के साथ अमर उजाला की खास बातचीत हुई।



इस खास बातचीत में उन्होंने कोरोना महामारी से लड़ने में नेचुरल इम्यूनिटी और एक अच्छे स्वास्थ्य की क्या भूमिका हो सकती है उस पर महत्वपूर्ण बातें की। 

सवाल - क्या सुपर इम्यूनिटी (नेचुरल इम्यूनिटी + वैक्सीनेशन) कोविड के आने वाले वैरिएंट से हमें बचा सकती है?

जवाब - ये जो साइंस है। इसे समझने में बहुत वक्त लग जाएगा कि नए वैरिएंट आएंगे, किस प्रकार के होंगे? ये जो वैक्सीन ली है ये उसके लिए इफेक्टिव होंगी या नहीं, लेकिन आपने ही अपने प्रश्न में जो एक बात बोली कि अच्छा स्वास्थ्य आगे आने वाले किसी भी वैरिएंट से लड़ने के लिए बहुत जरूरी है और उसमें वैक्सीन की एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। एक ही चीज मैं बोलूंगा कि जिस तेजी से वैक्सीन्स का साइंस इस महामारी में बढ़ा है। आगे आने वाले वेरिएंट के लिए भी जो वैक्सीन आएंगी। लोग उसे जरूर टाइम पर लगवाएं।

सवाल - कोरोना महामारी से लड़ने में साउथ एशिया के देशों में नेचुरल इम्यूनिटी का क्या योगदान रहा? इस पर आपकी क्या राय है?

जवाब - व्यक्तिगत स्वास्थ्य का महत्व जरूर इस महामारी में समझ आया। अगर आपकी आवाम स्वस्थ है, तो महामारी कम होगी, जो लोग अस्वस्थ हैं, उनमें ज्यादा होगी। इसमें वैक्सीन का बड़ा योगदान है। आप ये नहीं बोल सकते कि साउथ एशिया की इम्यूनिटी ज्यादा है। हर भू-भाग में, हर पॉपुलेशन के ग्रुप होते हैं कि कैसा आपका खान-पान है, कितना आप साफ पानी पी रहे हैं, सैनिटेशन कैसा है, आपको वैक्सीन लगी है कि नहीं? अच्छी इम्यूनिटी ने महामारी में कोविड को कंट्रोल करने में एक बड़ी भूमिका दिखाई है। इसलिए जरूरी है कि हम लोग वैक्सीन जरूर लें और उसे हर बच्चे तक पहुंचाएं।

सवाल - कोरोना महामारी से हमें क्या सीखने की जरूरत है? भविष्य में हमें क्या उपाय अपनाने चाहिए कि कोई महामारी अगर जन्म ले तो उसका दायरा काफी सीमित हो?

जवाब - कोरोना महामारी ने हमको एक चीज सिखाई है कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं है। दूसरा इसने हमको ये सिखाया है कि अच्छा स्वास्थ्य आपकी पॉपुलेशन का होना जरूरी है।  उदाहरण से समझिए जिनको डायबिटीज है, उनको ज्यादा रिस्क है। अगर आप बचपन से हेल्थ  कॉन्शियस रहे होते, अच्छा न्यूट्रिशन लिया होता, एक्सरसाइज की होती। ऐसे में आप डायबिटीज से अपने आप को बचा सकते थे। इस कारण जिन पॉपुलेशन ग्रुप का स्वास्थ्य अच्छा था, उनमें कोरोना महामारी का असर कम हुआ।

ऐसे में आने वाली महामारी से बचने के लिए एक सीख ये है कि लोगों को अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा। दूसरी सीख है कि एक अच्छे हेल्थ सिस्टम का होना जरूरी है। देश का स्वास्थ्य तंत्र कैसा है? अगर कोई बीमार होता है, तो वह कहां जाएगा, कितनी जल्दी उसको सुविधाएं मिलती हैं? ये होना जरूरी है।

अब आप देखिए वैक्सीन जब हमारे पूरे देश में पहुंची। उसके बाद कोरोना महामारी का असर कितना कम हुआ है। कई लोगों की इससे जानें बचीं। लॉकडाउन नहीं हुए, ऐसे में सरकार को एक अच्छे हेल्थ सिस्टम में इन्वेस्ट करना चाहिए।

तीसरी जो जरूरी सीख है हमको आगे आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण सुरक्षा यानी कैसे हमें प्रकृति के साथ समन्वय बनाकर रहना है ये बताना चाहिए। आपको जितनी जरूरत है, उतना ही दोहन करिए। ये इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर जो वायरस या पैथोजन आते हैं। ये जानवर और मानव इंटरफेस से आते हैं। इन सब की जरूरत हमें क्यों पड़ रही है? आज जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है। ये आपके स्वास्थ्य पर असर कर रहा है। आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा तो आप आने वाली महामारियों से नहीं लड़ पाएंगे। ऐसे में अगर हमें अपने जीवन के बारे में सोचना है, तो हमें अपनी जलवायु और पर्यावरण से प्यार करना सीखना होगा।

सवाल - देश में 30 लाख से ज्यादा बच्चे वैक्सीनेट नहीं हुए हैं। ये वो बच्चे हैं, जो ज्यादातर हाशिए के समाज से आते हैं। अक्सर देखने को मिलता है कि इन लोगों के बीच वैक्सीनेशन को लेकर कई तरह की मिसइंफॉर्मेशन होती है। ऐसे में इस समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है?

जवाब - ये जो आपने सवाल किया है ये बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें पूरे समाज के कंट्रीब्यूशन का होना जरूरी है, जिससे उन कम्यूनिटीज तक पहुंचा जाए। उनको जब मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हों, उस दौरान उन्हें वैक्सीनेशन के बारे में बताया जाए। अगर वो ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है, तो इस चीज का प्रयास किया जाए कि उनको उनके तरीके से कैसे समझाया जा सकता है?

इसमें फ्रंट लाइन वर्कर्स, एनजीओ, सेल्फ हेल्प ग्रुप कोई भी जागरूक नागरिक एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि आज की तारीख में सुविधाएं पर्याप्त हैं, सरकार की मंशा है देने की लेकिन फिर भी बच्चे जो आपने सवाल किया छूट जाते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

सवाल -  महामारी को रोकने में जीनोम सीक्वेंसिंग की क्या भूमिका है?

जवाब - देखिए जीनोम सीक्वेंसिंग से एक वायरस या पैथोजन कितनी तेजी से फैलता है ये पता किया जा सकता है। पोलियो को खत्म करने के लिए भारत ने इसे काफी अच्छे से उपयोग किया था। अभी कोविड में भी कर रहा है। इसका महत्वपूर्ण रोल है। इंडियन लैबोरेटरीज अभी हर जिले तक जीन सीक्वेंसर लगा रही है। इससे आने वाले दिनों में फायदा होगा।

इसका एक उदाहरण में देता हूं जैसे मुंबई में जब पोलियो का वायरस आता था, तो जीन सक्वेंसिंग में हमें पता चल जाता था कि ये मुरादाबाद से आया है या बिहार से। ऐसे में वायरस मिलता था मुंबई में तो सरकार काम करती थी मुरादाबाद में या बिहार में, तो ये सिर्फ जीन सीक्वेंसिंग से ही पता चल पाता था।
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