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मेंटल हेल्थ: मानसिक बीमारियों का इलाज लेने में देरी करते हैं भारतीय, 71% छात्रों में देखी गई ये गंभीर समस्या

Thu, 15 Oct 2026 01:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 15 Oct 2026 01:13 PM IST
सार

Mental Health Problems In India: मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता अमाहा की मेंटल हेल्थ रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, 56.2 प्रतिशत लोगों ने इलाज से पहले सेल्फ हार्म की बात स्वीकारी है। 53 प्रतिशत लोगों ने एक साल से अधिक समय बाद मदद ली। लोगों में चिंता, तनाव और उदासी आम परेशानियां रहीं।

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Mental Health Report 2026 Why Are People Delaying Professional Help Report Highlights Serious Concerns
भारतीयों में मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

क्या आप भी अक्सर बनी रहने वाली स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्या को अनदेखा करते रहते हैं? मेंटल हेल्थ की समस्याओं के कारण आपके रोजमर्रा के काम और रिश्तों पर असर हो रहा है, फिर भी डॉक्टर से मदद लेने से हिचकते हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि इस तरह की दिक्कतें कई बार गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं, इसलिए सभी लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

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मेंटल हेल्थ की समस्याओं को लेकर चिंता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट इस बारे में गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली संस्था (अमाहा) की रिपोर्ट के मुताबिक लोग मेंटल हेल्थ को लेकर पहले से ज्यादा अलर्ट जरूर हैं, पर इसको लेकर स्टिग्मा और झिझक अब भी लोगों को समय पर पेशेवर मदद लेने से रोक रही है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास जाने से पहले 56.2 प्रतिशत लोगों के मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आए। वहीं, करीब 53 प्रतिशत लोग एक साल से ज्यादा समय तक परेशानी झेलने के बाद इलाज के लिए पहुंचे। छात्रों में स्थिति और चिंताजनक दिखी, जहां 71.7 प्रतिशत ने सेल्फ हार्म वाले विचार आने की बात स्वीकार की। 
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ऐसे में सवाल है कि लोग समय पर मदद क्यों नहीं लेते, मानसिक तनाव से निपटने के लिए कौन से तरीके अपनाते हैं और इस स्थिति को कैसे बदला जा सकता है?

 

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मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : adobe stock images

भारतीयों में मेंटल हेल्थ की समस्या

'द अमाहा मेंटल हेल्थ रिपोर्ट 2026: अंडरस्टैंडिंग द जर्नी टू केयर इन इंडिया' नाम की इस रिपोर्ट के लिए 13,825 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। मेंटल हेल्थ को लेकर सामने आई इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे आधे से ज्यादा लोग पेशेवर मदद लेने में एक साल से अधिक समय लगा देते हैं। इस दौरान कई लोगों की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि उनके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार तक आने लगते हैं। 
 

  • 56.2 प्रतिशत लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से इलाज लेने से पहले खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात कही। 
  • छात्रों में यह आंकड़ा 71.7 प्रतिशत और बेरोजगार लोगों में 64.7 प्रतिशत था।
  • नौकरी करने वाले लोगों में 53.2 प्रतिशत ने ऐसे विचार आने की बात बताई।

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मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में डॉक्टरी मदद - फोटो : Freepik.com

मानसिक परेशानी के बावजूद  मदद नहीं लेते लोग

रिपोर्ट में सामने आया कि 53 प्रतिशत लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करने के बावजूद औसतन एक साल से ज्यादा समय तक डॉक्टर के पास नहीं जाते। इनमें से केवल 11.3 प्रतिशत लोगों ने ही परेशानी शुरू होने के एक महीने के भीतर इलाज या विशेषज्ञ की सलाह ली।
 

  • इससे पता चलता है कि भारतीयों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या महसूस होने और उसके लिए मदद लेने के बीच काफी लंबा अंतर हो सकता है। समय पर सहायता नहीं मिलने से लक्षणों के बढ़ने और इसके समय पर ठीक न होने की दिक्कत हो सकती है।
  • इलाज शुरू करने से पहले 56 प्रतिशत लोगों ने खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात बताई।
  • खुद को नुकसान पहुंचाने के विचारों को मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या के लक्षण के रूप में जाना जाता है, इससे आत्महत्या का खतरा बढ़ सकता है।
  • रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 15.4 प्रतिशत लोगों ने पेशेवर मदद लेने से पहले स्ट्रेस-एंग्जाइटी को कम करने के लिए शराब या अन्य नुकसानदायक नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किया था। 
  • 18 से 54 वर्ष आयु वाले पुरुषों ने महिलाओं की तुलना में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की बात अधिक बताई।

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स्ट्रेस-डिप्रेशन की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

कई मानसिक परेशानियों का बोझ

रिपोर्ट के अनुसार, 94.9 प्रतिशत लोगों में एक ही समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दो या उससे अधिक परेशानियां होने की बात भी देखी गई। औसतन हर व्यक्ति ने करीब पांच तरह की समस्याओं का जिक्र किया। सबसे कुछ दिक्कतें बहुत आम थीं।
 

  •  72.1 प्रतिशत लोगों ने एंग्जायटी की शिकायत की।इसमें किसी बात को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता, बेचैनी या लगातार आशंकित रहने की दिक्कत होती है।
  • 67.5 प्रतिशत लोगों ने स्ट्रेस की शिकायत की। इसमें काम, पढ़ाई, रिश्तों या दूसरी परिस्थितियों के कारण मानसिक दबाव महसूस होता रहता है।
  •  58.3 प्रतिशत लोगों ने अक्सर उदासी या मन खराब रहने की समस्या के बारे में बताया।
  • 55.6 प्रतिशत लोगों ने रिश्तों और आपसी संबंधों में परेशानी, जबकि 54.1 प्रतिशत लोगों मूड में बार-बार बदलाव की समस्या के बारे में बताया।


खुद से मानसिक समस्याओं को सुलझाने की कोशिश

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां होने पर करीब 55 प्रतिशत लोगों ने पहले दोस्तों या परिवार के सदस्यों से बात की थी। वहीं, 44.6 प्रतिशत लोगों ने खुद से अपनी परेशानी संभालने के तरीके अपनाए। इनमें 32.9 प्रतिशत लोग पहले भी थेरेपी यानी मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत के जरिए मदद लेने की प्रक्रिया आजमा चुके थे। वहीं, 19.4 प्रतिशत लोगों को पहले दवाएं लिखी जा चुकी थीं।

इससे पता चलता है कि कई लोग पेशेवर मदद तक पहुंचने से पहले अपने स्तर पर या अपने करीबियों की मदद से समस्या सुलझाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, लगातार परेशानी होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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