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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: डॉक्टर ने बताया, कोरोना में किस तरह से फायदेमंद है चेस्ट फिजियोथेरपी?
Sat, 15 May 2021 09:02 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Sat, 15 May 2021 09:02 PM IST
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छाती की समस्याओं से मिल सकता है चेस्ट फिजियोथेरपी से लाभ
- फोटो : iStock
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कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए इन दिनों लोग तमाम तरह के उपायों को प्रयोग में ला रहे हैं। संक्रमण की दूसरी लहर में वायरस, फेफड़ों और छाती को काफी क्षति पहुंचा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों को कहना कि जिन लोगों को संक्रमण के कारण छाती में समस्याएं हो गई हैं, उन्हें चेस्ट फिजियोथेरपी से काफी लाभ मिल सकता है। पर यह पद्धति कैसे काम करती है और इससे किस प्रकार से फायदा मिल सकता है, आइए जानते हैं।
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शनिवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञ से इसी विषय के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान इंद्रप्रस्थ अपोलो दिल्ली में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ विनी कंतरू ने सभी सवालों के जवाब दिए।
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कोरोना में कितनी कामयाब है यह थेरपी
डॉ विनी बताती हैं कि चेस्ट फिजियोथेरपी, कोविड-19 के रोगियों में काफी फायदेमंद हो सकती है। छाती के अंदर बलगम फंसने और सूखापन आ जाने के कारण सांस लेने में होने वाली दिक्कतों को ठीक करने में यह थेरपी कारगर साबित हो सकती है। इसके लिए विशेषज्ञ फिजियोथेरपिस्ट आपको फेफड़ों के अभ्यास के सही तरीकों के बारे में बताते हैं, जिससे रोगी को तेजी से लाभ मिल सकता है।
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कई तरह की जटिलताओं को दूर करने में चेस्ट फिजियोथेरपी है सहायक
- फोटो : getty images
चेस्ट फिजियोथेरपी की जरूरत कब होती है?
कई बार आईसीयू में भर्ती रोगी सही तरीके से सहयोग नहीं कर पाते हैं, ऐसे में भी चेस्ट फिजियोथेरपी के माध्यम से उनके फेफड़ों में जमे बलगम को निकालने और रोगी के लिए सांस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने में इस थेरपी से मदद मिल सकती है। लंबी सांस लेने वाले व्यायामों के सही तरीकों को सिखाने में भी फिजियोथेरपिस्ट आपकी मदद कर सकते हैं।
इन रोगियों के लिए भी है जरूरी
डॉ विनी बताती हैं कि कोरोना कई तरह की अन्य गंभीर बीमारी वाले लोगों के लिए भी जटिलताएं पैदा कर रहा है। कई रोगियों की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उनसे सामान्य तरीके से मूवमेंट भी नहीं हो पाता है, ऐसे रोगियों को भी फिजियोथेरपी से काफी लाभ मिल सकता है। रोगियों को ठीक होने में दवा के साथ उनकी मूवमेंट भी बहुत आवश्यक होती है।
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नोट: यह लेख इंद्रप्रस्थ अपोलो दिल्ली में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ विनी कंतरू से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
कई बार आईसीयू में भर्ती रोगी सही तरीके से सहयोग नहीं कर पाते हैं, ऐसे में भी चेस्ट फिजियोथेरपी के माध्यम से उनके फेफड़ों में जमे बलगम को निकालने और रोगी के लिए सांस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने में इस थेरपी से मदद मिल सकती है। लंबी सांस लेने वाले व्यायामों के सही तरीकों को सिखाने में भी फिजियोथेरपिस्ट आपकी मदद कर सकते हैं।
इन रोगियों के लिए भी है जरूरी
डॉ विनी बताती हैं कि कोरोना कई तरह की अन्य गंभीर बीमारी वाले लोगों के लिए भी जटिलताएं पैदा कर रहा है। कई रोगियों की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उनसे सामान्य तरीके से मूवमेंट भी नहीं हो पाता है, ऐसे रोगियों को भी फिजियोथेरपी से काफी लाभ मिल सकता है। रोगियों को ठीक होने में दवा के साथ उनकी मूवमेंट भी बहुत आवश्यक होती है।
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नोट: यह लेख इंद्रप्रस्थ अपोलो दिल्ली में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ विनी कंतरू से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।