सावधान: प्रेग्नेंसी की छोटी-छोटी दिक्कतें भी भविष्य में बन सकती हैं गंभीर बीमारियों की वजह, डॉक्टरों का अलर्ट
Pregnancy Complications: गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, प्री-एक्लेम्पसिया और पोस्टनैटल डिप्रेशन जैसी जटिलताएं आगे चलकर हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और क्रॉनिक किडनी डिजीज के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। ब्रिटेन में 14 लाख से ज्यादा महिलाओं पर हुए अध्ययन में विशेषज्ञों ने ये अलर्ट किया है।
विस्तार
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत चरण होता है, हालांकि ये नौ महीने अपने साथ सेहत से संबंधित कई चुनौतियां भी लेकर आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाओं में पहली बार ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या का भी निदान होता है, वहीं प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं जैसे प्रसवोत्तर डिप्रेशन के मामले जटिलताओं को और भी बढ़ाने वाले हो सकते है।
प्रसव के बाद अक्सर महिला का ध्यान अपने बच्चे और रोजमर्रा की जिंदगी में लौटने पर होता है। लेकिन एक नए अध्ययन ने महिलाओं की सेहत को लेकर एक ऐसी बात सामने रखी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान हुई कुछ परेशानियां सिर्फ उस समय तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बड़ी बीमारियों को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
ब्रिटेन में 14 लाख से ज्यादा महिलाओं पर हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के दौरान होने वाली अलग-अलग समस्याओं और बाद के वर्षों में सामने आने वाली बीमारियों के बीच लिंक को समझने की कोशिश की। आइए जानते हैं कि इसमें किन खतरों को लेकर अलर्ट किया गया है?
गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिक्कतों के खतरे
ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलता हुई थी, उनमें आने वाले वर्षों में दिल, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा पाया गया।
- अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बच्चे के जन्म के बाद होने वाला डिप्रेशन पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
- ये सभी स्थितियां आगे चलक चार प्रमुख बीमारियों- हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
बीएमजे मेडिसिन में प्रकाशित इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि सबसे ज्यादा चिंता गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को लेकर है। अध्ययन में ऐसी महिलाओं में आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज की दर करीब सात गुना ज्यादा पाई गई।
गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेम्पसिया भी बाद के स्वास्थ्य जोखिमों का कारण पाए गए। समय से पहले बच्चे का जन्म, गर्भपात, मृत बच्चे का जन्म और डिलीवरी से जुड़ी कुछ दूसरी परेशानियां भी भविष्य की सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली पाई गई हैं।
प्रसव के दौरान होने वाली दिक्कतें भी खतरनाक
किंग्स कॉलेज लंदन समेत कई संस्थान के शोधकर्ताओं ने मिलकर ये अध्ययन किया। इसमें पाया गया समय से पहले बच्चे का जन्म या गर्भपात, बच्चे को पोषण और ऑक्सीजन देने वाली प्लेसेंटा का जन्म से पहले ही गर्भाशय की अंदरूनी दीवार से अलग हो जाना (प्लेसेंटल एब्रप्शन) और बच्चे का अपनी गर्भावस्था की उम्र के हिसाब से बहुत छोटा या बहुत बड़ा होना भी आगे चलकर भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ाने वाला हो सकता है।
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर होना आपको हाइपरटेंशन का मरीज बनाने वाली हो सकती है। इससे भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर होने की दर तीन गुना से ज्यादा थी।
- क्रॉनिक किडनी डिजीज की दर भी करीब दोगुनी थी। इसके अलावा हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ा हुआ पाया गया।
- इसी तरह, बच्चे के जन्म के बाद होने वाला डिप्रेशन भी आगे की सेहत के लिए खतरनाक पाया गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के एक बड़े डेटाबेस का इस्तेमाल किया। इसमें उन महिलाओं की जानकारी देखी गई जो वर्ष 2000 से 2022 के बीच गर्भवती हुई थीं। शोधकर्ताओं ने ऐसी 14 लाख से ज्यादा महिलाओं की जानकारी का अध्ययन किया।
इनमें वे महिलाएं भी शामिल थीं जिन्हें गर्भावस्था के दौरान कोई जटिलता नहीं हुई थी। महिलाओं की औसतन चार साल तक निगरानी की गई।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिक्कतों और बाद की बीमारी के संबंधों के पीछे शरीर में होने वाली असली प्रक्रिया को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
- शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि गर्भावस्था की कोई जटिलता सीधे बाद में होने वाली बीमारी का कारण बनती ही है।
- ऐसी जटिलताएं महिला के शरीर में पहले से मौजूद या भविष्य में बीमारी का खतरा बढ़ाने वाली स्थितियों का संकेत हो सकती हैं।
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स्रोत:
Pregnancy complications and risk of cardiometabolic-renal conditions in 1.4 million women in England: longitudinal study
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