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जब नेहरू ने कहा उर्दू के बारे में मेरी ज़ाती राय और है, और मेरी गवर्नमेंट की राय और...

jawaharlal nehru
                
                                                         
                            पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक रोचक किस्से का ज़िक्र मशहूर शायर जोश मलीहाबादी ने अपनी आत्मकथा 'यादों की बारात' में की है। वे लिखते हैं- 
                                                                 
                            

नेहरू जी को उर्दू ज़बान से बड़ी मुहब्बत थी। उन्होंने मुझसे एक दिन कहा था कि उर्दू के बारे में मेरी ज़ाती राय और है, और मेरी गवर्नमेंट की राय और है। लेकिन मैं गवर्नमेंट पर अपनी राय थोपना नहीं चाहता, इसलिए कि यह मामला डेमोक्रेसी के खिलाफ़ है।
 

एक रोज़ लखनऊ स्टेशन पर उन्होंनेे रेलवे अफ़सरों को बुलाकर बहुत बुरी तरह फटकारकर कहा कि आप लोगो ने मुझे निरा जाहिल बनाकर रख दिया है। हर तरफ़ हिंदी के बोर्ड लगे हुए है। कुछ पता नहीं चलता कि यह खाने का कमरा है या लैवेटरी।

एक बार पाकिस्तान से रुख़सत लेकर मैं जब दिल्ली में उनसे मिला तो उन्होंने बड़े तंज़ के साथ मुझसे कहा था, ''जोश साहब, पाकिस्तान को इस्लाम, इस्लामी कल्चर और इस्लामी ज़बान यानि उर्दू की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन अभी कुछ दिन हुए, मैं पाकिस्तान गया और वहां यह देखा कि मैं शेरवानी और पायजामा पहने हुए हूं, लेकिन वहां की गवर्नमेंट के तमाम अफ़सर सौ फ़ीसदी अंग्रेज़ों का लिबास पहने हुए है। मुझसे अंग्रेज़ी बोली जा रही है और हद यह है कि मुझे अंग्रेज़ी में संबोधित भी किया जा रहा है। 
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6 वर्ष पहले

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