मेरी आंखों ने की मुझसे ही बेवफाई
भूलाया था जिसे, चेहरा वही पलकों में बसाया
मेरे होंठों ने की मुझसे ही रुसवाई
मिटाया था जिसे, नाम वही फिर दोहराया
मेरी धड़कन बन गई है हरजाई
रूठे थे जिससे, प्रीत वही सिर्फ निभाया
मेरी अपनी न रही, मेरी ही परछाई
साथ छोड़ा जिसने, आज बनी खुद वही काया
मेरे ग़म में सहेली बनी थी, जो तनहाई
मुँह मोड़ा जिसने, महफिल उसी का सजाया
मुझे सहन न हुई इश्क़ में वो जुदाई
दिल तोड़ा जिसने, उनकी ही यादों का महल बनाया
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