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रानी पद्मावती...

Rani Padmavati...Nitu Thakur
                
                                                         
                            एक हाथ में विष का प्याला
                                                                 
                            
एक हाथ में धरी कटार
आज तजेंगे प्राण मगर
दुश्मन से ना मानेंगे हार
क्या समझ रहे थे तुम अबला
जो हाथों में आ जायेंगे
हम वीर शेरनी की जाई
हम तुमको धुल चटायेंगे
है लाज शरम गहना माना
घूँघट में शीश छुपाते हैं
पर वक़्त पड़े तो बन काली
राण में तलवार चलाते हैं
नासमझ समझ का फेर है ये
हम दास तेरे हो जायेंगे
यदि वक़्त पड़ा तो अग्नि पे
जौहर का खेल दिखायेंगे
ये हिन्द देश की छत्राणी
ना कदम हटायेंगी पीछे
तू कदम बढ़ा के देख जरा
कुचलेंगें कदमों के नीचे
तुझ जैसे नीच नराधम को
हम कभी शरण ना आयेंगे
पग आज बढ़ा के देख जरा
तुझको औकात दिखायेंगे
राज महल की दीवारों को
हम शमशान बनायेंगे
धरती माँ की आन की खातिर
अपनी चिता जलायेंगे
शर्म लुटाके जीने से
बेहतर होती है वीरगती
जब तक थे तन में प्राण
यही कह रही थी रानी पदमावती

नीतू ठाकुर
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8 वर्ष पहले

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