गोद एक मां की हुई सूनी
कितनी मांओं ने आंसू बहाए
दर्द ये मातृत्व का ऐ कातिल !
क्यों आखिर तुम समझ न पाए।
जन्म दिया तुमको जिस मां ने
उसने भी तुझको धिक्कारा होगा
देखा होगा चाकू जब तेरा
वो मासूम मां मां पुकारा होगा।
रोया होगा अंकल कहकर
फिर भी तुम न दया दिखाऐ
गोद एक मां की हुई सूनी
कितनी माओ ने आंसू बहाऐ ।।
छोड़ कर कुछ दूर गई थी
नही छोड़ा था तेरे खातिर
नही जानती थी वह गुड़िया
घात लगाए बैठा है सातिर
किस भाई के संग खेलेगी अब
सोंच के आंखो से ऑसू आऐ
गोद एक मां की हुई सूनी
कितनी माओ ने आंसू बहाऐ ।।
पापा छुट्टी मे जल्दी आना
बोला होगा पापा बाये
नही जानते थे उसके पापा
शायद अब फिर न मिल पाये
गोद एक मां की हुई सूनी
कितनी माओ ने आंसू बहाऐ ।।
- कोयल मिश्रा
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