नाजायज औलादें ही
देश का इतिहास
बिगाड़ा करती हैं।
जायज तो कुर्बान
हो जाती हैं
इतिहास बनाने के लिए।
पद्मावती क्षत्राणी का नाम नहीं
राजपूताने के जौहर व्रत के
स्वर्णिम अतीत का वह स्तम्भ है
जिस पर सदियों से हमें दम्भ है।
प्राणों की आहुति वीरांगनाओं ने दी
सतीत्व के लिए,
राजपूत वीरों ने दी
देश हित के लिए।
उस समय
फिल्मांकन करने वाले
ना तो वीर थे और
ना ही वीरांगनाऐं थी
दोनों के बीच ये सब,
मुगलों के हरम खानों में थे।
तभी तो तथ्यों को
बेशर्मी से पेश कर रहे हैं,
खुश करने के लिए
देश के दुश्मनों को,
अपनी मां पद्मावती की
इज्जत बेंच रहे हैं।
- दिनेश
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X