ताजमहल तुम बचे रहना
ओ ताजमहल!
सुनो,
तुम बचे रहना
फन-ए-तामीर बनकर
जब तक मुहब्बत बची है
जब तक कायनात बची है
तुम याद नहीं बनना।
कहते हैं दुनिया में
सिर्फ दो तरह के लोग हैं-
एक वो, जिन्होंने ताजमहल को देखा है
और;
एक वो, जिन्होंने ताजमहल को नहीं देखा है।
अभी तो मैंने भी तुम्हें नहीं देखा
और;
मेरे जैसे बहुत से लोगों ने तुम्हें नहीं देखा।
ताजमहल!
तुम बचे रहना सबके देख लिए जाने तक
कायनात के बचे रह जाने तक।
अनीता मैठाणी
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