दिसम्बर के महीने की
कड़क ठंड, जबरदस्त कोहरा
और तुषार इंसान, पशु, पक्षी
हर एक बेहाल सर्दी से
आज की सुबह-सुबह
जब हम-तुम, ओस पड़ी
हरी घास पर जब नंगे पैर
साथ साथ टहल रहे थे, तब,.....
कई बार तुम्हारे पैर के पंजे,
मेरे पैर के पंजे से छुए,
हर बार यही लगा कि,
"ओस" की भी "तपिश" होती हैं...!!
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