हाथ से हम अपने आशियां लुटा बैठे,
किया जिस पर भरोसा धोखा उसी से खा बैठे,
अकेला छोड़ दिया उसने मुझे सहरा में,
जिसके मासूम चेहरे पर दुनिया लुटा बैठे,
लामकां मे आज फिरुं मैं दर-बदर,
अजनबी शहर में कहीं न जां गंवा बैठें।
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