उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें
रोइए किस के लिए किस किस का मातम कीजिए
~हैदर अली आतिश
एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा
~परवीन शाकिर
कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
~रहमान फ़ारिस
अब नहीं लौट के आने वाला
घर खुला छोड़ के जाने वाला
~अज्ञात
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