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ग़ालिब के ये हैं 10 मशहूर शेर...

मिर्जा गालिब
                
                                                         
                            शेरों-शायरी की दुनिया में मिर्जा गालिब एक पैमाना है जिसके आगे लगभग सारे शायर नतमस्तक हैं। गालिब ने शायरी की दुनिया को मोहब्बत और गम से ऐसा लबरेज किया है कि उलफत का गुलशन आज भी गालिब की शायरियों से महक रहा है। गालिब की परिपाटी में चलकर ही कई शायरों ने अपने को मुकम्मल किया है। 220 साल बाद भी गालिब के चाहने वालों की कमी नहीं है। इतने सालों बाद उतनी ही शिद्दत से गालिब को आज भी तारीफ मिल रही है। गालिब पर हम यहां काव्य चर्चा के तहत  उनके 10 स्पेशल शेर पेश कर रहे हैं। 
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का...

1-मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

2-उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है
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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का...

8 वर्ष पहले

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