तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा
- बशीर बद्र
मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी
- राहत इंदौरी
एक मौसम की कसक है दिल में दफ़्न
मीठा मीठा दर्द सा है मुस्तक़िल
- इफ़्तिख़ार राग़िब
रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया
अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया
- खालिद गनी
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