जीवन की मुश्किल चुनौतियों में आदमी अगर अपने को संभाल ले तो उसे एक गहरी समझ जरूर मिलती है। इसी समझ को शायद जीवन दर्शन कहते हैं। महान शायर और लेखकों ने जीवन दर्शन को अपनी रचनाओं में बड़ी संजीदगी से उतारा है। उर्दू के शायरों ने तो मखमली शब्दों से जिंदगी को कई दार्शनकि पुट दिए हैं। कई गजलें और शेर जीवन दर्शन का गहरा एहसास देते हैं। इनमें से ही चुनिंदा 10 शेर हम आपके लिए यहां पेश कर रहे हैं।
जैसा दर्द हो वैसा मंजर होता है...
जैसा दर्द हो वैसा मंजर होता है
मौसम तो इंसान के अंदर होता है
-अजीज एजाज
अजल तो मुफ्त में बदनाम है जमाने में
कुछ उनसे पूछ, जिन्हें जिंदगी ने मारा है
-फैज
उस शख्स के गम का कोई अंदाजा लगाए...
उस शख्स के गम का कोई अंदाजा लगाए
जिसको कभी रोते हुए देखा न किसी ने
-वकील अख्तर
तिरे चराग अलग हों, मिरे चराग अलग
मगर उजाला तो फिर भी जुदा नहीं होता
-वसीम बरेलवी
रगों में दौड़ने-फिरने के हम नहीं कायल...
रगों में दौड़ने-फिरने के हम नहीं कायल
जो आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
-गालिब
आंसू तो बहुत हैं आंखों में जिगर लेकिन
बिंध जाए तो मोती है, रह जाए तो दाना है
-जिगर मुरादाबादी
कहानी मेरी रुदादे-जहां मालूम होती है...
कहानी मेरी रुदादे-जहां मालूम होती है
जो सुनता है उसी की दास्तां मालूम होती है
-सीमाब अकबराबादी
मिट्टी का जिस्म लेके चले हो तो सोच लो
इक रास्ते में एक समंदर भी आएगा
-सलीम शाहिद
कह रहा था मौजे-दरिया से समुंदर का सुकूं...
कह रहा था मौजे-दरिया से समुंदर का सुकूं
जितना जिसका जर्फ है उतना ही वो खामोश है
-अज्ञात
रंज से खूगर हुआ इंसां तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें इतनी पड़ीं मुझ पर कि आसां हो गयीं
-गालिब
साभार-अंदाज अपना अपना
संकलन-रमेश चंद्र
भारतीय ज्ञानपीठ
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