आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सूंड फ़ैज़ाबादी: हे मेरे गांव के परमप्रिय कुत्ते

soond faizabadi funny poems on village
                
                                                         
                            सूंड फ़ैज़ाबादी का जन्म 1 अगस्त 1928 को उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद के अलऊपुर में हुआ था।उन्होंने 9वीं क्लास से ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। सूंड फ़ैज़ाबादी का वास्तविक नाम दान बहादुर सिंह था।  
                                                                 
                            

हे मेरे गांव के परमप्रिय कुत्ते
मुझे देख-देख कर चौंकते रहो
और जब तक दिखाई पड़ूं
भौंकते रहो, भौंकते रहो, मेरे दोस्त
भौंकते रहो

इसलिए की मैं हाथी हूं
गांव भर का साथी हूं
बच्चे, बूढ़े, जवान, सभी छिड़कते हैं जान
मगर तुम खड़ा कर रहे हो विरोध का झंडा
बेकार का वितंडा

अपना तो ऐसे-वैसों से कोई वास्ता नहीं है
‘परिश्रम के अलावा कोई रास्ता नहीं है’
इसलिए मैं हूं पूजनीय–वंदनीय
मेरा सम्मान है मर्यादा है
क्योंकि मेरी ‘दूरदृष्टि है पक्का इरादा है’
और तुम ढूंढ रहे हो कौरा
कौरे के लिए दौरा
हाये रे मुफ़्तख़ोरी पहरे के नाम पर चोरी
बिलकुल वाहियात हो, रीते हो
आदमियों से भी गये-बीते हो

कई बार तुम्हें सजाएं मिलीं तुम्हें कड़ी-कड़ी
मगर कुत्ते की पूंछ मुड़ी की मुड़ी
सुना है तुम्हारी जबान में अमृत बसता है
फिर जहर क्यों बो रहे हो?
मैं तो हंस रहा हूं, तुम रो रहे हो।

भौंक-भौंक कर क्या कर पाओगे
कुत्ते की मौत मर जाओगे
अपने गांव के प्रति वफ़ादार बनो
अपनों से प्यार करो
तुम्हारी तरह कितने लोग
बेकार के चक्कर में चौंकते रहते हैं
हाथी चला जाता है कुत्ते भौंकते रहते हैं।

(सूंड फ़ैज़ाबादी की यह हास्य कविता यार सप्तक नाम की किताब से ली गई है, यह किताब डायमंड पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुई है।)
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर